महाभारताची कथा

महाभारताची कथा

story of Mahabharata

महाभारताची  कथा  हि  संपूर्ण  द्वापरयुग  मध्ये   घडल्या  गोष्टीचा  एक  भाग  आहे. महाभारताची  कथा  म्हणजे  भगवदगीता  मध्ये  जे भगवान  कुष्ण  यांनी  जे  शोल्क  किंवा  खाई  उद्देश  दिले  आहेत  त्या  सर्व  गोष्टीचा  गुच्छ  होये. महाभारत  हे  द्वापरयुग  मध्ये  झाले  एका  भीषण  युद्धाला  दिले  नाव  आहे. हे  नाव  भगवान  कुष्ण  यांनी  ठेवले  होते  महाभारत  हि  फक्त  कथा  नसून  तो  प्राचीन  संस्कृत  भाषे  मध्ये  लहिलेला  एक  काव्येग्रंथ  सुद्धा  आहे.    

महाभारताची कथा

महाभारत  हा  काव्येग्रंथ  महर्षी  व्यास   यांनी  हि कथा  सांगतली  व  भगवान  गणेश  यांच्या  कडून  हि  हा  ग्रंथ  लिहून घेण्यात आला  हा  ग्रंथ  हा  न  थमात  जसे महर्षी  व्यास  सांगतील  तसा  हा  ग्रंथ  हा  लिखाण हि  पूर्ण  कार्याचे होते  म्हणून  महर्षी  व्यास  या  साठी  मदत मागण्यासाठी  भगवान शिव  यांच्या  कडे  गेले. 

त्यावेळी  शिव  याना  आपल्या  पुत्र गणेश  याला  तो  ग्रंथ  लहिण्यासाठी  पाठवली  व भगवन  गणेश  यांनी  हे न थमता  हे काम  पूर्ण  केले महाभारत  हिंदू  धर्मामधील  एक  प्रसिद्द  महाकाव्यग्रंथ  आहे. महाभारत  या  ग्रंथा  मध्ये   सुमारे १,१००० श्लोक  आहेत  या  ग्रंथ  मध्ये  अनेक  गोषीतेचे  वर्णन  हे केलं  आहे.

जसे  न्याय  शिक्षण  महाभारता  मध्ये वैद्यकशास्त्र, ज्योतिष, युद्धशास्त्र, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र, वास्तुशास्त्र, शिल्पशास्त्र, कामशास्त्र, खगोलशास्त्र  व  धर्मशास्त्र   या शस्त्र  चे देखील  वर्णन  हे महाभारत  या  ग्रंथा  मध्ये  केले  आहे. 

कथासार 

महाभारत  या  कथेची  सुरवात  शांतनू  या  राज्यच्या  कारकिर्दी  मध्ये  सुरु  होते. शांतनू  हे  गुरु  वंश  मध्ये  जन्म  झाले  राजे  होते महाराज  शंतनू  यानाचा  विवाह  गंगा  या देवी  संग  झाला. पण  विवाह  पूर्ण होण्या  आधी  गंगा  यांनी  एक  शर्त ठेवली  होती. 

 गंगा  यांनी  केले  कोणती  हि काम  करण्यासाठी  शांतनू  राज्य  कोणताही  प्रश्न  हा  विचारणा नाही  व  शर्ट  शांतनू  राज्यांनी  मान्य केली  होती  शांतनू  व गंगा  याना  ८ मुले  झाले  पण  गंगा  देवी  आपल्या  प्रत्येक  मुलाला  जन्म  झाल्या  क्षणी  नदी   समर्पित  करत होती. 

यामुळे  शांतनू  या राज्याची   संयम  हा  तुटत  चला  व  ज्यावेळी  गंगा  आपल्या  ८  मुलाला  नदी  मध्ये  समर्पित  करत  असताना  शांतनू  राज्याने  गंगा  याना  विचारले  याचे  कारण  हे गंगा  यांनी  सांगतले  कि  या आठीहि  मुले हे  वासुदेवाचे  अवतार  होते  व  या आठ  मुलांना  गुरु  विशिष्ट  यांनी  त्यांची  गाय  हरण  केल्या मुले  त्यांना  श्राप मिळाला  होता. 

यामुळे  गंगा  हि  आपल्या  मुलांना  नदी  मध्ये  समर्पित  करत होते  व  हा आठवा  मूल  म्हणजे  भीष्म  पितामह  व  गंगा  देवी ने वचन  तुटल्या  कारण  मुले  देवव्रत  वाल्या  मुलाला  आपल्या सांग घेऊन  गेली  यामुळे  शांतनू  राज्य  सारखे  नदी वर  येत  व गंगा  नदी ची माफी मागत  परत  एका दिवशी  गंगा  नदी  परत आली  देवव्रत  वाल  मूल  म्हणजे  भीष्म  याना  शांतनू  राज्यांना  परत दिले.   

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