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भगवान कृष्ण

भगवान कृष्ण

 lord krishna

भगवान  कुष्ण  हे  विष्णू  देवाचे  एक  रूप  आहे. भगवान  कुष्ण  हे  हिंदू  धर्मामधील त्रिमूर्ती देवा  पैकी  विष्णू  या  देवाचे हे  एक रूप  आहे. भगवान  कुष्ण  हे  करुणा  माया  आणि  प्रेमाचे  देव  म्हणून   मानले जाते  कुष्ण  यांचा  जन्म  हा पुराण व ग्रंथो  नुसार भाद्र  महिना  मध्ये  अष्टमी  तिथी  मध्ये  बुधवारी  मोहिनी नक्षत्र  व वृष राशि मध्ये मध्य रात्री  मध्ये  झाला. कुष्ण  यानाचा  जन्म  दिवस हा  कुष्णजन्माष्टीमी  या  नावाने  जर वर्षी  हिंदी  दिनदर्शिका  प्रमाणे  साजरा  केला  जातो.   

भगवान कृष्ण

भगवान  कुष्ण  हे  हिंदू  धर्मा  मधील  लोकप्रिय  देव  मानले  जाते. कुष्ण  यांचा  जन्म  हा  द्वापरयुग च्या  काळामध्ये  झाला होता. परत ज्या  वेळी  श्री  कुष्ण  यांचा  अवतार  समापती  म्हणजे  कुष्ण  यांचा  मूर्तीव  झाला  त्यावेळी  द्वापरयुग  चा  शेवट  झाला  व कलयुगला  सुरुवात  झाली. 

 कुष्ण यांच्या  प्रत्येक  जीवन मधील प्रत्येक  शेण  हा त्यांच्या काही  कर्तव्याशी  जुळले आहेत.  कुष्ण  या शब्दाचा  अर्थ  म्हणजे  सगळ्यांना  आकर्षित  करणारा  असा  हा होतो. कुष्ण  यानाचा  अनेक  दंत  कथा  महाकाव्ये  या  मध्ये  श्री कुष्णाचा  ओळख  हा केला आहे.  

महाभारत ,  भगवद  पूर्ण ब्रह्मवेर्त  पुराण  यासारख्या  अनेक  पुराण  मध्ये  श्री  कुष्णाचे  पात्र  हे दर्शवले  आहे. श्री  कुष्ण  याना  अनेक  उत्तम  ह्या  दिल्या  आहेत  जसे कि एक दीव मूल एक  खोडकर  मूल व एक  आदर्श  प्रेमी  आणि  बसवरी  वजवणारा  तरुण मुलगा  यासारख्या   उत्तम  या दर्शवला  आहेत.

कुष्ण  यानाची  आई  नाव देवकी  व वडिलांचे  नाव वासुदेव  मथुरेचा  राजा  कंस  हा  देवकी  याचा  भाव  होता  कंस  याला  भविष्यवाणी  केली  होती  कि   देवकीचा  पुत्र  हा  तुझा  वध  करेल  म्हणून  कंस  यांनी  देवकी  ला वासुदेवाना  कैदेत  ठेवले होते  देवकीचे  ८  पुत्र  हे  कंस यांनी मारले  होते  ज्या  वेळी  श्री  कुष्ण  चा  जन्म  झाला  त्यावेळी  वासुदेवानी  गोकुळा  मधील  मित्राला  श्री  कुष्ण  याना दिले.  

भगवान  कुष्ण  यांचे स्वरूप 

कुष्ण  यांचे  निवासस्थान  हे द्वारिका,गोकोल,मथुरा , वैकुठं  या  सारख्या  ठिकाणी  निवास्थान  आहे. श्री  कुष्ण याना  आठ  बायका  दोन  बहीण   व  ८०  पुत्र  हे होते त्याच्या  भावाचे  नाव हे  बलराम  व  सुभद्रा  व  द्रौपदी असे या दोन  बहिणी  चे  नाव  होते  द्रौपदी  हि  मानले  बहीण  होती  आणि  सुभद्रा  हि  सखी बहीण होती . 

राधा  हि  कुष्ण  ची  प्रेयसी  होती कुष्ण  याना  प्राण्याची  खूप  आवड  होती.  खासकरून  कुष्ण याना  घोडा  हा प्राणी  आवडत  होते कुष्ण  यांच्या कडे  चार  घोडे होते  पहिल्या  घोड्याच्ये  नाव  हे व त्यांची  नाव  हे  कुष्ण  यांनी  त्यांच्या  वैशिट्ये  प्रमाणे  ठेवण्यात  आली होती. 

त्यामधील  पहिल्या  घोड्याचे नाव हे शैव्य  व दुसऱ्या  घोड्याचे  नाव  हे सुग्रीव  व  तिसऱ्या  घोड्याचे  नाव  हे बालहक  आणि  चोथ्या  घोड्याचे  नाव  हे मेघपुष्प   होते. भगवान  कुष्ण  यानाचे  शस्त्र  सुदर्शन  चक्र हे होते भारतामधील महाराष्ट्र या राज्य  मधील पंढरपूर  या  ठिकाणचे विठ्ठल  हे  सूड  कुष्णाचे अवतार  आहेत. भगवान कुष्ण  यानाचे मंत्र  ओम नमो भागवते  वासुदेवाय  नमः  हे आहे.भगवान  कुष्ण  याचे  तीन  मुख्ये  तीर्थशेत्र  मथुरा वृंदावन व द्वारिका हे आहेत.    

  

   

   

   

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