व्हॉयेजर-1

 व्हॉयेजर 1

  voyager 1

व्हॉयेजर १ हे  अंतराळ  यान  आहे.  व्हॉयेजर १( voyager 1) हे अमेरिकन  संशोधन  संस्था  नासा (NSA) याने Titan III E या  प्रेक्षका द्वारे ५ सप्टेंबर १९७७ रोजी प्रक्षेपित करण्यात  आले होते. जे  सूर्याच्या  बाहेर  म्हणजे  आपली  आकाशगंगा  सौडून हेलिओस्फीअरच्या पलकडील असल्यतेला  सोर मंडळाचा  तसेच  अवकाशात  असले  विविध  भागाचे  संशोधन  व  संपूर्ण  पने त्या  गोष्टीचा  अभ्यास  करण्यासाठी व्हॉयेजर-१  हे  यान  पाठवण्यात आले  आहे. 

व्हॉयेजर 1

या  यानाचे  मुख्ये  मोहीम  हि  बुहस्पती  व  शनी सारख्या  ग्रहाचा  आणि  अवकाश  मध्ये  असले  बाहेरील  ग्रहांचा  व  त्याच्या  चंद्राचा  अभ्यास  करणे  हे  काम  व्हॉएजर-१ चे  आहे . पुथ्वी  या  आपल्या  ग्रहांपासून  व्हॉएजर-१  हे  १५ अरब  पेशा  लांब  अंतरावर  हे  व्हॉयेजर -१ हे  आहे. या मोहीम  मध्ये  ऐकून  दोन  यानावर  काम  करण्यात  आले  होते  ते  म्हणजे  व्हॉएजर-१ व व्हॉएजर-२.

 सूर्याच्या  बाहेरील बाजू  म्हणजे  हेलिओस्फीअरच्या याला पार  करणारा पहिल यान  बनले  आहे. २०१२ मध्ये  हे  यान  आकाशगंगा  ला सोडून अंतरतारकीय अंतरिक्ष  मध्ये  प्रवेश  केला त्या  मुले  हे  यान  आकाशगंगा  मधून  बाहेर  पडणारी  पहिली  वस्तू  बनली  आहे. 

व्हॉयेजर १  या  याना  जवळ  एक  सोनेरी  रंगाचे  रेकॉर्डर  आहे.  त्या  मध्ये  पुथ्वी  वर  असले  जीवन  व  संस्कृती यांच्या  मधील  विविधता ते  चित्रित  करण्या  साठी  लागणारे  आवाज  व  चित्र  याचा  समावेश  आहे. २०२५ या  कालावधी पर्येत  उपकरणाला  चालू  ठेवणाचे  इंधन  हे  व्हॉयेजर १ मध्ये आहे. 

व्हॉएजर-१  चा  इतिहास   

१९६० च्या  कालावधी  मध्ये   बाहेरील  ग्रहाच्या  अभ्यास  साठी ग्रॅन्ड टूरच यांनी  प्रस्ताव  मांडला  या  प्रस्ताव  मुले  नासा (NSA) या  अमेरीकीन  संस्थेने एक  मोहिमे  वर  काम  करण्यास  सुरवात  केली  पोयोनीयर १० या  अंतराळ  यानाने  एकत्रीत  केलेल  माहिती प्रमाणे  ने  अभियंतांना  गुरु  ग्रह भवती  तीव्र   किरणोत्सर्गाचा  अधिक प्रकारे  सामना  करण्यासाठी  व्हॉयेजर १  ची  रचना  करण्यासाठी  मदत  झाली  होती.

 पहिल्यांदा व्हॉयेजर १ ला  नाव हे मरिनर प्रोग्रामच्या मरिनर 11 असे ठेवण्यात  आले होते  पण बजट  कपाती  मुले शनी व गुरु  या मोहिमेला  फ्लायबायमध्ये कमी करण्यात  आले  व मरिनर ज्युपिटर-सॅटर्न प्रोब  असे  नामांतर  करण्यात  आले  पण  प्रोब  चे  रचना हि मरिनर ज्युपिटर-सॅटर्न प्रोब या  पेशा  वेगळी  दिसू  लागली  म्हणून  या मोहिमे  चे  नाव  बदलून व्हॉयेजर १ असे  ठेवण्यात  आले  होते.

फ्लायबाय म्हणजे  शनी  व  गुरु  या ग्रहाचा  जवळ  जाणे व्हॉयेजर १  हे शनी  च्या  जवळ ५ मार्च  १९७९ गेले  याचे  अंतर  हे  १२४,०० किलोमीटर  एवढे  आहे  तसेच  गुरु या  ग्रह  जवळ १२ नोव्हेंबर  १९८० रोजी  गेला  या ग्रहाचे  अंतर  हे  ६४९० किलोमीटर  एवढे आहे. 

कालावधी   

या  मोहिमे  चा  कालावधी  हा  ऐकून  ग्रहांसाठी ३ वर्ष ३ महिने  व ९ दिवसा  साठी  प्लॅनिंग  केले  होते  पण  कालावधी  या मोहिमेचा  ४६ वर्ष  ९ महिने  ३ दिवसा  साठी  एकूण  प्लॅनींग केला  होता इंटरस्टेलर मोहीम  हि  एकूण  ४३ वर्ष  ५ महिने  २ दिवसा  साठी  निवोजे केले  होते. व अजून देखील हि मोहीम  चालू आहे. 

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