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हूवर धरण

हूवर धरण काय आहे

What is the Hoover Dam

हूवर  नावाचे  हे  एक मोठे  धरण  आहे.  याला  हूवर  धरण(hoover dam) असे  म्हणतात  हे  धरण  अमेरिका  मध्ये  आहे. हे  मुख्येतू नव्होडा  व  अ‍ॅरिझोना या  राज्य  मधून  वाहणारी   कॉलोराडो नदीवर बांधले हे  एक  धरण  आहे. हूवर धरणाचे  रचना अभियंता चे  नाव  हे जॉन सैवेज  हे  आहेत  यांनी  या  डाँ ची  सम्पूर्ण रचना  हि  केली  आहे. 

हूवर धरण

हूवर  धरणाचे  क्षेत्रफ़ळ  हे  एकूण ६४० वर्ग  मीटर  एवढे  आहे  कॉलोराडो  नदी  चा  प्रहवा  हा अडवून  या  धरणाची  निर्मिती  हि  करण्यात  अली  या  धरणाचे  काम  करण्या साठी  नदी  चा  प्रवाह  हा  बदलण्यात  आला  होता  या  नदी  मध्ये  ४  बोगदे  पाडून  या  नदी  चा  प्रवाह  बदला  होता. व  बांधकाम  साठी  जमीन  मोकळी  सोडली  होती. 

हूवर धरणाचा इतिहास

या धरण  बांधण्या  मध्ये  मुख्य  हेतू  म्हणजे  अमेरिकी  मधील  दुष्काळी  व  वाळवंटी भाग  मध्ये  पाणी  पोहोचवणे व विजनिर्मीती  करण्या  साठी हे धरण बांधले १९३१  मध्ये  हूवर  या धरणाचे  बांधकाम  हे  सूर  झाले. व  १९३६  मध्ये  या  धरणाचे  बांधकाम  हे पूर्ण  झाले  ३० सप्टेंबर  १९३६  मध्ये  या  धरणाचे  उद्‍घाटन  करण्यात  आले. या धरणाचे बांधकाम  खर्च  हा सुमारे  अमेरिकन $४९ दशलक्ष  एवढे  होते 

या  धरणाचे  बांधकाम  हे  १०००  कामगारांनी  च्या  अतूट  महेनतीने  पूर्ण  झाले  हे  बांधकाम  पूर्ण  करताना  १००  कामगाराना  आपला  जीव  गमवा  लागला होता .  त्या  वेळी  चे   राष्ट्राध्यक्ष हर्बट  हूवर  यांच्या  नावा  मुले  या  धरणाला  हूवर  धरण असे संबोधले पण  या  धरणाचे  नाव पुढे  हेच  पढले. 

हूवर  धरण  हे ३७९ लांबी  व  २२१. ४ मीटर  व उंची  आहे. या  धरणाच्या  माघे  मिड नावाचे  एक तळे  आहे हे तळ  खूप  मोठे  आहे  तळे  कदाचित  हूवर धरण  मुले  बनले  असावे या तळाचे  क्षेत्रफ़ळ  हे ६०३ एवढे  आहे.

हूवर धरणाचे  बांधकाम  

हूवर धरण  बांधण्या  साठी  सगळ्यात मोठी  गोष्ट म्हणजे   बांधकाम  करण्यासाठी  जमीन  सुखी  ठेवणे  कारण  अभियंत  थेट  कॉलोराडो  नदी सारख्या  मोठ्या  नदी  मध्ये  बांधकाम  करू  शेकत  नाही  त्यासाठी एकमात्र  मार्ग  म्हणजे  नदी मध्ये    वळणारा  बोगदा  निर्माण  करणे   नदी  वळवण्या  साठी  ऐकून  चार  बोगदे  पाडण्यात  आले हे बोगदे  पाढण्या  साठी जंबो  ड्रिल  चा  उपयोग  करण्यात  आला  हि  ड्रिल  खास  करून  ह्या   बोधगया  साठी  तयार  करण्यात  आली  होती  जंबो  ड्रिल  च्या सहाय्याने  डायनॅमिती  साठी  होले  पाधली  जात होती. 

व  डायनॅमिती  च्या  सहाणे  एक  ठराविक  अंतर  वर जाऊन  विस्फोट  केला  जायचा  व  यामधून  दगड  कोठे व बारीक चुरा   बाहेर  काढून  त्या  बोगढचे  काँक्रीटीकरण  केले  जायचे   व  या  पदतीने  सारख सारखं करून  तबल १८  महिन्याचा  कालावधी  हे बोघडे  पूर्ण  करण्या साठी  लागत  होते  हे  पूर्ण  करून  जो  बोगद्याच्या  प्रारंभ  बिदू  होता  त्या  ठिकणी  बोगदा  निर्माण  करत  असताना  निघालेले  दगड कोठे  व बारीक चुरा  त्या  ठिकाणी  टाकला  यालाच  कॉपर डॅम  असे  म्हणतात असे  कॉपर  डॅम  शेवट  च्या  बिंदू  सुद्धा  बनवण्यात  आला  यामुळे  नदी  चा  प्रभाव  हा  वळवण्यात  यश  आले  व  बांधकाम  साठी  सुकी  जमीन  मिळाली.

 हूवर  धरण  बनवण्या साठी  सुकिया  जमनी  वरील  जागा  मजबूट  होण्या साठी  ढीले  दगड  काढण्यात  आले  व  पाण्याचे  दाब  कमी  करण्या साठी  अर्ध्या वर्तुळ आकाराचे बांधकाम  करण्याचे  ठरवले  या  साठी  धरणाच्या  रचणे  प्रमाणे  त्या  नदीच्या  भितींना  विस्फोट  करून  आकार  देण्यात  आला  व  थोडे  थोडे  बॉक्स   बॉक्स  धरणाचे  बांधकाम  हे  कॉक्रिटरीकरण  करण्यात  थोडे थोडे  बॉक्स  बॉक्स  करण्याचे  कारण  म्हणजे  काँक्रीट  चे  तापमान  मापात  राहण्या  साठी  जर तापमान  अति  गरम  झाले तर  त्या  बांधकाम  मध्ये  भेगा  पडू शिकतात असे  या  धरणाचे  बांधकाम  हे पूर्ण  करण्यात  आले. 

हूवर धरणा  मध्ये वीज निर्मिती कशी केली जाते

हूवर  धरण  मध्ये वीजनिर्मिती  करण्यासाठी  इंग्लिश  मध्ये  U आकाराचे  अक्षराची  रचने  मध्ये  करण्यात  आल्ये आहे  या  U आकाराचे  अक्षराची  रचने मध्ये  जनरेटर  बसवण्यात  आले आहेत. या U आकाराचे  अक्षराची  रचना  ऐकून  २०० मीटर  एवढी  आहे.  ऐकून  या  रचणे  मध्ये  १७ जनरेटर व टरबाइन  बसवण्यात  आले  आहेत या  रचणे  मध्ये  जे  टरबाइन  बसवले  आहेत त्यांना  फ्रान्सस  टरबाइन  म्हणतात. 

पाणी  नि  हे बोगद्या  मधून  येत असताना निमोळती  होत  आली असते त्यामुळे  कोलआकरमध्ये  ज्या वेळी  पाणी धडकते टरबाइन  फिरू  लागते  व टरबाइन जनरेटला  फिरवाचे  त्या  मुले  वीज  निर्मिती  हि होत  असते  पण येवढ वजनाने  जड व मोठे  जनरेटर आणि टरबाइन व  इतर उपकरणे  हे त्याच्या  जागे  वर  बसवणे  हे  एक आव्हान  होते  त्यासाठी  अभियंतानि  केबल वये व पुली केबल   हा  पर्या  शोधला  आपण  हे  केबल  वये  अजून  सुदा  हूवर  धरण  वर बघू  शेकतो इंटक टॉवर मधून  खाली  असलेल्या  टरबाइन  पर्येंत  पाणी  पोहोचवण्य  जे  नदीचे  पाणी  वाळवण्या साठी बोगदे  वापरले  होते. 

 ते धरणाचे  बांधकाम  पूर्ण झाल्यावर काहीच  काम न्हवते  म्हणहून त्यातील  एक  जवळ  असलेला  बोगदा  वापरला  व  पाणी  टरबाइन  पर्येत पोहोचवले पण  दुसऱ्या  साठी  परत  एक  बोगदा  पाडण्यात  आला. धरण  ओव्हरफ्लोव  होऊ  नये  म्हणून  जो  दुसरा बोगदा  नदीचे  पाणी  वाळवण्या साठी बोगदे  वापरले  होते त्यातील  एक  बोगदा  हा  ओव्हरफ्लोव  झालेली  पाणी  बाहेर  काढले  जाते त्यास स्पिलवे  असे  म्हणतात. 

ओव्हरफ्लो झालेले  हे  पाणी  बाहेर  काढने गरजेचे  असते  कारण हे  पाणी  खाली  असली  सर्व  उपक्रम  हे  बरबाद होण्याचा  खतरा  असतो  या  मुले  स्पिलवे  हे  महत्वाचे  आहे. या  धरणा  मधून  तबल २०८० मेगावॅट  वीज  हि  निर्मित  केली  जाते  व ११०००  घनमीटर  प्रतिसेकंद  हा जलप्रभाव  हा  या धरण  मधून  होऊ शिकतो.       

  

सिद्धिविनायक मंदिर

 सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई

  siddhivinayak temple Mumbai

सिद्धिविनायक  मंदिर   हे   महाराष्ट्रची  राजधानी  मुंबई मध्ये  प्रभादेवी   या  ठिकाणी  आहे हे  मंदिर  महाराष्ट्रा  राज  मधील  खूप  प्रसिद्द   मंदिर  आहे. सिद्धिविनायक  मंदिर  हे खूप  जुने  मंदिर  मानले  जाते  हे  याचे  वय हे  २००  वर्ष  एवढे  आहे. सिद्धिविनायक  मंदिर  हे  गणेश  या  देवाला  समर्पित  आहे  हे  एक  हिंदू  मंदिर  आहे. 

मुंबई  या  शेरातील सोमवंशी  क्षत्रिय  या  राजाच्या  क्षत्रीयकुलातील म्हणजेच  सध्याच्या  आगरी  समाजतील लक्ष्मण  विठू  आणि देऊबाई  पाटील यांनी  १९ नोव्हेंबर १८०१ रोजी  हे मंदिर  बांधले. हे  महाराष्ट्र  मधील  सगळ्यात  श्रीमंत  मंदिर आहे.

  मंदिराच्या   गर्भगृहाच्या  लाकडी  दरवाज्यच्या  आतील  बाजू  वर  अष्टविनायकाच्या प्रतिमा  म्हणजेच  महाराष्ट्र  मधील  गणेश  देवाची  आठ  रूपे  कोरली  आहे  व  तसेच  खाम्बा  वर  देखील अष्टविनायकाच्या  प्रतिमा  या  कोरल्या  गेल्या  आहेत. गर्भगृहा  जो  छत  आहे  त्या  वर  सोन्याचा  मुलाव  चढलेला  आहे  व  मध्यवर्ती  सिद्धिविनायक  या  रूपाची  मूर्ती  आहे.  या  मंदिराच्या  परिसरात  हनुमानाची मंदिर देखील  आहे 

 मंदिराच्या  बाह्यभागात  एक  घुमत  आहे  जो  कि संध्याकाळी  च्या  वेळी अनेक रंगानी  उजळतो  हा  घुमत  जर  तासानी  रंग  हा बदलत  राहतो  या घुमत  अगदी  खालो  खाल  गणेशाची  मूर्ती  आहे. सिद्धिविनायक  मंदिर  हे एक  लहान  मंदिरा  पासून  आज  भव्य  मंदिरा  मध्ये  विकसित झाले. सिद्धिविनायक  गणपती  हा  नवसाला  पावणारा  गणपती  म्हणून  प्रसिद  आहे.

 श्री सिद्धी विनायक गणपती मंदिर ट्रस्टच्या मंडळ या  ट्रस्टच्या  सदस्या  तरफे मंदिरात येणाऱ्या  देणग्या  व इतर  कामे  हे नियत्रण  केले  जाते.  या   ट्रस्टची  निर्मीती  हि बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट कायदा १९५० या  कायदाच्या  अंतर्गत  करण्यात अली आहे. सिद्धिविनायक  मंदिराला  सुमारे  १०० दशलक्ष(Us 1.3$)  रुपये  एवढी  देणगी  आली  जाते. 

श्री  सिद्धिविनायक  ची  मूर्ती  हि  पूर्ण  काळ्या  पाषाणाची  बनवली  आहे. त्या  मूर्ती  उंची  हि  पाय  पासून २.५ फूट  उंच  व रुंदी  हि २ फूट  रुंद  आहे. मूर्ती  ची  सोंड  हि उजवीकडे  झुकली   आहे  व  उजव्या   हातात  कमळ  परशु व डाव्या  हातात गणपती चा  आवडता  पदार्थ  लाडू वटी  वाटी आहे. भगवान  शिव सारखे डोळे आहेत  व  काळ्या  दगडावर  सम्पूर्ण  मूर्ती  कोरली आहे.  

भगवान  गणपती हे  गणपती या  नावाने  ओळखले  जातात  गणपती  या  नावाचा  अर्थ  असा  होतो  कि गणाचा  प्रमुख  नर कुजुरूप  हत्ती च्या  डोक्यचे  रूप  धारण  करतो  व  रध्दी  व सद्धी  सोबत  असतो  समृद्धी आणि समृद्धीच्या देवी  म्हणजे रिद्धी आणि सिद्धी त्याच्या बाजूला गणपती हा उभ्या  असतो  संपूर्ण  मूर्तीला  हा  भगव्या  रंगाचा  मुलवा  चढवला  आहे  व  सोनेरी  मुकवटाने  सुशोभित केलेले  आहे  देवी रध्दी  आणि  सद्दी  याना  हिरव्या  रंगाची साड्या  नसलेय  आहेत.    

कामाख्या देवी मंदिर

 कामाख्या देवी मंदिर   

  kamakhya devi temple

कामाख्या  देवी  मंदिर  हे  एक  शक्तिशाली   मंदिर  आहे  कामाख्या  देवी  मंदिर  हे  माता  सती  ला  समर्पित  आहे.  हे  मंदिर  ५१ शक्ती  पीठ  पैकी  एक  आहे   हे  मंदिर  ब्रह्मापुत्र  नदी  जवळ  आहे   या मंदिर  चे  अनेक  रहस्य  आहेत  ते  आपण  या  आर्टिकल  मध्ये  पहाणार  आहे. कामाख्या  देवी  मंदिर  हे  भारता  मध्ये  आसाम  या  राज्य च्या  राजधानी  गुवाहाटी  गोवती  या  ठिकाणी  मंदिर  हे  आहे . हे  मंदिर  नीलांचल पर्वत  रांगेमध्ये  वसले  आहे  डोगरा  मध्ये  असल्या  कारण  मुले  या  मंदिरास तांत्रिक शास्त्रात विशेष महत्त्व आहे. 

ज्या  वेळी  भगवान  शिव  व  माता  सती  यांचे  मिलन  झाले  होते  पण  हे  मिलन  माता  सती  यानच्या  वडिलांना  हे  मिलन   पसंद  न्हवते  कारण  सती  च्या  वडलांना  महादेव  हे  आवडत  नव्हते  म्हणून च  आपमाण करण्याच्या  भावनेने  सतीच्या  वडिलाने  एक  यद्न्य  चे  नियोजन  केलय  त्या  यद्न्य  ला  सर्व  देवी  दैवताला  आमंत्रण  दिले  पण  महादेव  व  देवी  सतीला  या  यद्न्य  चे  आमंत्रण  दिले  नाही  आमंत्रण  न  दिल्या कारण  मुले  देवी  चलबिचल  होण्यास  सुरवात  झाली  व   महादेव  ला  त्या  यद्न्य  ला  जाण्यास  साठी  विचारले   पण  महादेव  आमंत्रण  नसल्या  कारणांनी  नकार  दिला. 

 पण  माता  सती  स्वता  जाण्याचे  विचारले  महादेवानी त्या  साठी  परवानगी  दिले  व  माता  सती  त्या  यद्न्य   मध्ये  गेली  व  सतीने  वडलांना  विचारले  कि  महादेवाना   का  आमंत्रण  दिले  नाही  पण  माता  सती च्या  वडलांनी  सर्व  देवी  व देवांच्या  पुढे  महादेवानाचा  खूप  आपमान केला  या  मुळे  देवी  सतीना  खूप  राग  आला  व  त्या  यद्न्य  च्या  अग्नी  मध्ये  आपले  शरीर   समर्पित  केले 

 हे  सगळे  महादेवन  त्यांच्या  शेकती  मुले  कळाले  व महादेव  तिढे  आलये  व  हे  बगताशनी  महादेव  खूप  राग  व  दुखी  झाले  व  सती  चे  पार्थिव  शरीर हे  हाताने  उचलये  व  त्यांनी  तांडव  करण्यास  सुरवात  केली  ते  शरीर  घेऊन  पूर्ण  अवकासातून  फिरू  लागले  या  मुले  त्यांचे  कर्तव्ये  विसरले  व  सुर्ष्टी  वर  ठोका  निर्माण  होण्यास  सुरवात  झाली

  या  मुले  विषुनु  देवांनी  न  दिसणारे  सुदर्शन  चक्र  हे  त्या  सतीच्या  पार्थिव  शरीरावर सोडले  या  मुले  त्या  शरीराचे   तुकडे  झाले  व  हे तुकडे  पुथ्वी  वर  पडले  असे  ऐकून  ५१  तुकडे  पुथ्वी  वर  पडले  व  हे तुकडे  ज्या  ठिकाणी  पडले  त्या ठिकाणास  ५१ शक्ती  पीठ  असे  म्हणतात  व  कामाख्या देवी  मंदिर  हे   या  सक्ती  पीठ  मधील  एक  आहे  येथे  माता  सती  ची  योनी  चा भाग  पडला  होता  व  या  मंदिर   मध्ये योनी ची  पूजा  हि  केली  जाते.  या  योनीतुन  कायम  जल  प्रवाभीत  होत  असते  

पण  ज्या  अम्बुवाची पर्वाच्या काळात देवी भगवती रजस्वला होते व  या काळात  योनी  मधून  पाण्याच्या  ठिकाणी  लाल  पाणी  वाहते  या  वेळी  मंदिरा  मध्ये  एक  पांढरा  कपडा  ह्या  ठिकाणी  सोडला  जातो  व हे  मंदिर  त्या काळात  पूर्ण पने  बंद  असते.  या  वेळी  ब्रहम्पुतर  नदी सुदा  पूर्ण  लाल  होत  असते  ज्या  वेळी  हा  काळ  समतो  व  मंदिर  उघडले  जाते  त्या  वेळी   तो  कपडा  पूर्ण  पने लाल  झाला  असतो हा  कपडाच  भक्ता  मध्ये  प्रसाद  म्हणून  वाटला  जातो.           

  

स्टॅच्यू ऑफ युनिटी

स्टॅच्यू ऑफ युनिटी

statue of unity 

स्टॅच्यू  ऑफ  युनिटी  हि  एक भारतातील  गुजरात  मधील  जगातील  सर्वात  मोठी  मूर्ती  आहे.  जी  सरदार  वलभाई  पटेल  याना  समर्पित  आहे. स्टॅच्यू  ऑफ  युनिटी  साठी  लोखंड  साठी  भारतातून  किसान  कडून अनुपयोगी  लोखंड  गोळा  करण्यात  आले होते . स्टॅच्यू  ऑफ युनिटी  चा  बांधकाम  कालावधी  पूर्ण  करण्यासाठी  ४ वर्ष लागले  होते .

 

हा  पुतळा  गुजरात  राज्यात   राजपिपला  शेराजवळ नमर्दा  नदीत  सरदार  धरणजवळ  साधू  या  बेटावर  उभारला  आहे  हे  स्मारक  तबल २०००० मीटर  शेत्रात  पसरले  आहे  या  प्रकल्पाचे  बांधकाम  हे ३१ ऑक्टोबर  २०१४ पासून  सूरु  झाले  व  ऑक्टोबर  २०१८  मध्ये  या  प्रकल्प  चे  काम  हे  पूर्ण  झाले 


 सरदार  वलभाई  पटेल  कोण  होते. 

ज्या  वेळी  भारता  ची   इंग्रजांच्या  गुलामगिरीतून  सुटका  झाली  त्या  वेळी  भारताचे  एकूण ५६५  संस्थाने  हे झाले  होते  व  त्या   संस्थाने  चे  वेगळे  राज होते  व   त्या  संस्थाने  देश  गोसीत  करण्याचा  डाव  हा  त्या  राज्यचा  होता. पण  हा  डाव  सरदार  वलभाई  यांनी  मोडून  काढून  त्या  संस्थाना  भारत  मध्ये  एकत्र  करून  घेण्या  मध्ये  सरदार  वलभाई  पटेल  यांची  मोठी  भूमिका  होती. सरदार  वलभाई  पटेल  यानाचा  जन्म  हा ३१ ऑक्टोबर  १८७५ या  वर्षी  झाला. त्याच्या  पिताजी  चे  नाव  हे जावेरभाई  व  आई  चे  नाव  लाडबाई  हे  होते.

  सरदार  वलभाई  पटेल यानि  माध्यमिक शाळा चे  शिक्षण  हे  २२ वर्षी  पूर्ण  केले  होते  त्याना  वकील  बनायच होत  व  त्या  साठी  त्यांनी २ वर्ष  मध्ये  च  विकीला  कडून  पुस्तेके  खेऊन  त्यांनी  परीक्षा  पास  केली  व  ते  वकिलाचे  शिक्षण  घेण्यासाठी  लंडन  या  देश  मध्ये  गेले  व   त्यांनी  हालाकी  मध्ये  त्यांनी शिक्षण  पूर्ण  केले व  शिक्षण  पूर्ण  झाल्या  नंतर  तेथील  सरकारने  अनेक  नोकरीच्या  संधी  दिल्या  पण  सरदार  वलभाई  पटेल  यानि  ती  संधी  खेतली  नाही  व ते  परत  भारत  मध्ये  परतले व  त्यांनी  अहमदाबाद  विकालाचा  सराव  केला  व  त्या  त्यांनी  खूप  प्रसिद्धी  मिळवली 

 १९१७ पासून  त्यांना  राजकारण मध्ये  रुची  येऊ  लागली  व त्यांनी १९१७ मध्ये  अहमदाबाद  कंमिसिओनर (commisioner) या  पदा  साठी  निवडूंक  लढली  व  जिंकली व  या  मुले  राजनीती  मध्ये  त्याची  रुची  अनेक  वाढली  व  ह्या  मध्ये खूप  प्रसिद्धी मिळवले  व  भारताच्या  राजनीती  मोठा  भाग  निर्माण  झाला.

 बार्डोली  जिल्या  मध्ये  ब्रिटीश  सरकार  हे  तेथील  शेतकरी  पासून  अधिक  चा  कर  हे  घेत  होते  त्यासाठी त्यांनी  एक  सत्यग्रह  अंदोलनणाची  रूपरेखा  तयार केली. व  त्यांनी  शेतकऱ्यांचे  प्रतिनिधीतव  केले  त्यामुळे  त्यांना  शेतकऱ्यान तर्फे  सरदार  हे  उपाधी  दिली  व  त्यांच्या  नवा  पुढे  सरदार  हे  लागले व  १९४८ ला  ज्या  वेळी  भारत देश हा  स्वतंत्र झाला  त्या  वेळी  भारताचे  पहिले  उपपंतप्रधान  वलभाई  पटेल हे झाले . सरदार  वलभाई  पटेल  यांचा  मूर्तीव  हा  १५ डिसेंबर  १९५० मध्ये  झाला . 

स्टॅच्यू ऑफ युनिटी बांधकाम 

या  मूर्तीला  बनवण्या  साठी  तब्बल  ३००  अभियांत्रिकी व  ४००० कामगार  हे  एकत्र  मिळून  काम  करत  होते. तबल  २५००० टन  स्टील  व  ७०००० सीमेत  चा  वापर  हा  या  मूर्ती  मध्ये  करण्यात  आला  आहे. सरदार  वलभाई  पटेल  यांच्या  मूर्तीचे  वजन  हे  २२००० हत्तीन  एवढे  अधिक  आहे  या  मूर्ती  ची  उंची  हि  १८२ मीटर  एवढी  आहे . हि  मूर्ती  येवढी  मोठी  आहे  कि  अवकाश  तुन  सुधा  दिसते. 

 या  मूर्तीला  बनवण्या  साठी    तबल अमिरिकेन  425 दशलक्ष डॉलर्स म्हणजेच  इंडियन  ३०००  कोटी  एवढा  खर्च  आला  आहे. या  मूर्ती साठी  ४२ महिने  चा  कालावधी  दिला  होता.  मूर्तीला  उभा  करण्या  साठी  पाया  मजबूत  करणे  गरजेचे  होते  व  या  मुले   १३० टन  लोखंड  या  पाय  मध्ये  घालण्यात  आले  व   हे  लोखंड  तबल  ३०००० कोटी  शेतकऱ्यांनी  ते लोखंड  दान  केले  व  ह्या  लोखंड  वर  प्रक्रिया  करून  ते  लोखंड वापरण्यात आले. 

या  मूर्ती चा  पाया  हा  एक  अलोम्पिक  स्वामिंग  पूल  एवढं  खोल  व  पसरत  होता  व  या  मध्ये  उत्तम  दर्जे  चे  काँक्रीट  वापरण्यात  आले  हे  काँक्रटीत  असे  होते  कि  ते  लगेच  निराकरण  होत  होते.  मूर्ती  बनवण्या  साठी  ज्यादा  तर  एक  मोठ्या  आकार  चा  एक  कॉलम  बांधला  जात  पण  सरदार  वलभाई  पटेल  यांच्या  मूर्ती  मध्ये  असे  डिझाइन  खेतले  होते  कि  त्यांचे  दोनी  पाय  वेगवेगळे  व  एक  पाय  पुढे  असे  दर्शवले  होते 

 व  सरदार  वलभाई  पटेल  हे धोती  खलाअत  होते  या  मुले  अभियांत्रिकि  पुढे  हे  एक  मोठे  आवाहन  होते  या  समस्यांची  तोड  असा  काढला  कि दोन  कॉलम  वेगवेगळे  घेतले .  मूर्तीला  येगदम  पूर्ण  बनवणे  शेक  नव्हते  या  मुले कास  या  धातू  चे वेगवेगळे  ६६५९  भाग  जोडून  या मूर्तीला   बनवण्यात आले  हे  भाग  जोडणे  एक  कोड्या  पेक्षा  कमी न्हवते  या  मूर्ती  च्या  छाती  जवळ  एक  गॅलरी  आहे  त्या  मधून  पर्येतक  बाहेरील  नजर  बगु  शेकतात.   

   

कोयना धरण

कोयना धरण

koyna dam

कोयना  धरण  हे  एक  महत्वाचे  धरण  आहे  व  महाराष्ट्रा  मधील  प्रमुख  धरण  आहे . कोयना  धरणा  मुळे  महाराष्ट्र  प्रकाशमय  व  सिचन  युक्त  झाले  आहे. कोयना  धरण  मधील  आजू  बाजूचा  परिसर  खूप  चांगला  आहे  व  तसेच  यथील  कोयना जलविद्युत प्रकल्प  पाहण्या  साठी  पर्यटन  खूप  मोठ्या  प्रमाणात  येत  आहे . आपण  या  आर्टिकल  मध्ये  कोयना धरणाचा इतिहास  बघणार आहोत . 

 

कोयना  धरण  हे  इसवी सन १९६३ मध्ये  बांधून  पूर्ण  करण्यात  आले  कोयना  धरण  हे  महाराष्ट्र  मध्ये  सातारा  जिल्या  मध्ये  पाठन  या  तालुक्यात  आहे. कोयना  धरण  चा  मुख्ये  हेतू  हा जमीन  सिचना  साठी  व  वीजनिर्निती  साठी  केला  जातो . कोयना  हा  धरण  महाराष्ट्र  मधील  मोठ्या  धरण  पैकी  एक  आहे. कोयना  धरण  हे  कोयना  नदी  वर  वसले  आहे. कोयना  धरण  च्या  साह्याने मोठ्या  प्रमाणात  वीजनिर्मिती हि  केली जाते  त्या  मुले या  धरण  ला  महाराष्ट्रची  जीवन  रेखा  असे  म्हणतात. 

कोयना धरणाचा इतिहास 

कोयना  हि  कुष्णा  नदी  ची  प्रमुख  उपनदी  कोयना  या  नदी   चे  उगमस्थान  हे  महाबळेश्वर मध्ये  आहे  कोयना  नदी  हि  सहयाद्री  मध्ये   किमान  ६५ किलोमीटर  अंतर  चा  प्रवास  हि  कोयना  नदी करते  या  भाग  मध्ये  खूप  पाऊस  पदाच्या  या  मुले  पुराची  स्तिती  निर्माण  होयची  तर  दुसरीकडे  महाराष्ट्र  मध्ये  काही  ठिकाणी  पाऊस  न  पडल्या  मुले  दुष्काळ  स्तिती  निर्माण  होत. यामुळे  शेती  च्या सिंचना  साठी  म्हणून  कोयना   धरण  बांधण्याचे  ठरले  पण  परत  वाढत्या  वीज  मागणी मुले  जलविदुत  प्रकल्प  करण्याचे  हे  कामास  सुरवात  झाली. 

कोयना  प्रकल्प  हि  मूळ  कल्पना  ब्रिटिशांची  सण  १९१० ते १९१५  मध्ये टाटा  या  कंपनी  ने सर्वे   केला  पण  त्या  वेळी झालेले पहिले  व  दुसऱ्या  महायुद्ध  मुले या  प्रकल्पला  अनेक  अडचणी आल्या  या  नंतर  १९४५ साली  बोंबे  इलेक्ट्रिक या  कंपनी  ने सर्वे  केला  व १९५३ साली  या प्रकल्प  ला भारत सरकार  तर्फे   मान्यता  मिळाली व  या  प्रकल्प व  प्रकल्प  मध्ये आडवे  येणारे  गावाचे  पुनर्वसनाचे  कामास सुरवात  झाली. अखेर  १९५४ साली  मुख्येमंत्री  मोरोजी  देसाई  यांच्या  असते कोयना  प्रकल्प   चे भूमिपुजन  झाले. व या  नंतर  प्रत्यक्ष्यात  कामास  सुरवात  झाली. 

  १९६० साली  पहिले व दुसऱ्या  टपाचे  काम  पूर्ण  झाले त्यावेळी  भारताचे  पंतप्रधान  यांनी  या  प्रकल्प  ला भेट  दिली  होती  १९६४ मध्ये  कोयना धरणाचे  काम  हे  पूर्ण  झाले  पण  १९६१ पासूनच  या  प्रकल्प  मध्ये  पाणी साठवण्यास सुरवात  झाली कोयना  धरणाची  लांबी हि ८०७. ७२ मीटर  इतकी  असून  उंची  हि  १०३. ०२ मीटर  एवढी  आहे.  हे  धरण महाराष्ट्र  मधील  सर्वाधीक  उंच  आहे. कोयना  धरण  ची  साठवण  क्षमता  हि २७९७. ४ दशलक्ष  घनमीटर  एवढी  आहे .  कोयना  धरण  बांधण्याचा  प्रकार  हा  रबर  काँक्रीट  आहे.  या  धरणाला  ६ वक्राकार  दरवाजे  आहेत. या दरवाज्या   मधून  ज्या  वेळी  धरण  पूर्ण  भरते  त्या  वेळी  पाणी  सोडले  जाते.

कोयना  धरण जलविद्युत प्रकल्प  

कोयना  धरण  व जलविदुत  हे  महाराष्ट्र  साठी शुक्तिपीठ  आहे. आज  वर्तमान  काळ मध्ये महाराष्ट्र  राज्यातील  एकूण जलविदुत  निर्मितीपैकी  सुमारे ५९  टक्के  वीज  हि  कोयना  प्रकल्प  महाराष्ट्र  मधील  जनतेला  पुरवत  असतो  १९६२ पासून  महाराष्ट्र्र  मधील  अंधार  दूर  करून  प्रकासमए करण्या  साठी  मोठी  भूमिका  आहे. कोयना  या  धरण  वर  २० मेगावॅट  चे  २ टर्बाइन , ७० मेगावॅट  चे  ४ टर्बाइन , ७५ मेगावॅट  चे  ४ टर्बाइन ,८० मेगावॅट  चे  ४ टर्बाइन, २५० मेगावॅट  चे  ४ टर्बाइन  असे  एकूण  १० टर्बाईन  बसवले  आहेत.  १९६०  मेगावॅट  एवढी  प्रचंड  वीजनिर्मिती  कोयना  प्रकल्प  मधून  तयार होते. 

कोयना धरणा  मध्ये वीज निर्मिती कशी केली जाते

धरणा  मध्ये  पाणी   जे  साठवले  जाते  त्यास   स्थिर ऊर्जा  असे  म्हणतात  ज्या  वेळी  पाणी  विशिष  असे  केलेल  वाट  या  वाटेचे  असी  रचना  केली  जाते  कि  पाण्याची  गती  हि  वाढले  जाते  व  अश्या  रचणे  मधून जेव्हा  पाणी  वाहते त्या  वेळी  त्या  स्थिर ऊर्जा  चे   रूपांतर हे  गतिज  ऊर्जा  मध्ये   होते व  ज्या  वेळी  टर्बाइन  च्या पाट्या  वर  पाणी  धडकते  व  पाते  फिरू  लागतात  त्या  वेळी गतिज  ऊर्जा  चे  रूपांतर  हे  यांत्रिक  ऊर्जा  मध्ये  होते  व  या  मध्ये  ज्या  वेळी  चुंबक  सोबत  असलेली  तांबाची  कॉल  या  मुले  घर्षण  निर्माण  होते  व विजेची  निर्मिती  हि  केली  जाते.  

  
 

    

पर्यावरण प्रदूषण

 पर्यावरण प्रदूषण

 environmental pollution

पर्यावरण  प्रदूषण  हे  जगभर  सगळ्यात  मोठी   समस्या  झाली  आहे. या  मध्ये  पर्यावरण  प्रदूषण  चे  अनेक  प्रकार  आहे  ते आपण पहाणार आहोत   या  आर्टिकल मध्ये  environmental pollution म्हणजे  नेमके  काय  आहे    पर्यावरण  प्रदूषण  म्हणजे  जे  पर्यावरण  नैसर्गिक आहे  त्या मध्ये  बदल  होणे. 

वायू , जल व  स्थल  व  आणि  माती  या  साधताना  मध्ये  बदल  होणे  जसे  कि रासयनिक  व  जैविक   या  मधील  असा  बदल  होणे  कि  जो  मानव  व  इतर  जीव  जंतुना  आणि  झाडे  याना  नुकसान  होणे   यालाच  पर्यावरण प्रदूषण  असे  म्हटले  जाते .  पर्यावरण   या  मध्ये  अनेक  वायू  म्हणजेच  गॅस चा  समावेश  आहे.  हे  गॅस  म्हणजे  ऑक्सिजन , कार्बनडायॉक्सिड व  इतर  गॅसेस , व  नाइट्रोजन   हे  आहेत .  पण  पर्यावरण  मध्ये  मुख्येतू  नायट्रोजन  चा  समावेश  असतो  व  त्याच्या  झालो खाल ऑक्सिजन  आणि  कारबंडायऑक्सिड हे  खूप  अल्प  प्रमाणात  वातावरण  मध्ये  असते  हे  च   कार्बनडायऑक्सिड ज्या  वेळी  मानवाच्या  काही  क्रिया  मुले  वाढते  त्यात  काही  बदल  होणे  व  तसेच  जल  मध्ये  काही  तत्वान मध्ये  बदल  होणे  याला  पर्यावरण  प्रदूषण  असे  म्हणतात. 

प्रदूषणाचे प्रकार:-

 पर्यावर  हे  अनेक  बढतीने  दूषित होत  असते  जसे  कि  वायू , जल  व  माती  हेच   पर्यावण   चे  मुख्ये खडक  आहेत व या मध्ये  प्रामुख्याने   प्रदूषण  करण्या  मध्ये  मानवाचा  मोठ्या  प्रमाणात  हात  आहे  पर्यावरण   मध्ये   मुख्ये   नेमके पाच   प्रदूषण  चे  प्रकार कोणते  आहेत  हे  आपण    पहाणार  आहे. 

वायू प्रदूषण:-

वायू प्रदूषण  हे  वातवरण  मध्ये  अनेक  वेग  वेगळे  घटक  येतात  व  यामुळे  वातावरणा  मध्ये  समतोल  राहत  नाही  म्हणजेच   नैसर्गिक  हवनामध्ये  बदल  होणे  वायू  प्रदूषण  हे  कार्बनमोनोऑक्सिड, सल्फरडायॉक्सिड,कोरोफ्लोरोकार्बन व  नायट्रोजन  ऑक्सिड  जे  कि  मोटर  वाहन  मधून  न  निर्माण  होत असते या  गॅसेस  मुळे  वायू  प्रदूषण  होते  वायू  प्रदूषण  हे मुख्येतू  कार  हे  वाहन  बनवणारी  कंपनी   जी कि  सर्वात मोठ्या  प्रमाणात  कार्बनऑक्सिड हे  वातवरण मध्ये  सोडते . वायू  प्रदूषण  मुले  प्राण्यांना  व  मनावना  त्रास  होतो  मानव  मध्ये  मुख्येतू  श्वास  घेण्या  मध्ये अधचन  हि येत असते. 

जल प्रदूषण:-

कारखानो  मधून  किवा  किवा  अन्य  इतर  कोष्टी  मधून  दूषित  पाणी  व  रसायने  हे  नदी  , तलाव  व  समुद्रा  मध्ये  सोडल्या  मुले  सर्व  चांगल  पाणी  हे मोठ्या  प्रमाणात दूषित  होते  यालाच  जल  प्रदूषण  म्हणतात. वायू  प्रदूषणा  या कारना  मुळे दूषित  गॅस  व   कण  पाऊसा च्या  पाण्या  मध्ये  मिसळणे  याला  आपण   ऍसिडिक  रेन असे  म्हणतो.  या  अम्लीय  वर्षा  मुळे  दिखील  जल  प्रदूषण  हे मोठ्या  प्रमाणात  होत  असते. पेट्रोल  व  दिझेल  याची  आयात  व  निर्यात  हि  समुद्रा  मार्गी  होत  असताना  त्या  मध्ये  जहाज  मधून  पेट्रोल  व डिझेल  याची गळती  होणे  किंवा  ते  जहाज  दुर्घटनाग्रस्त  होणे  या मुले  देखील  जल  प्रदूषण  मोठ्या प्रमाणात  होते  व  या  मुले  समुद्रा  मधील  जीवन  धोका  निर्माण  होतो. जल  प्रदूषणा  मध्ये सगळ्यात  अग्रेसर  देश  हा चीन  आहे चीण   मध्ये  मोठ्या प्रमाणात  जल  प्रदूषण  होत असते.  

भूमी प्रदूषण:-

ठोस  कचरा  हा  जमनी  वर  खूप  दिवसा  पासून  साठवून  ठेवणे   तसेच  जमनी  वर  मोठ्या  प्रमाणात  कीटक  नाशकातचा  वापर  करणे  यालाच  भूमी  प्रदूषण  असे म्हणतात. भूमी  प्रदूषण  म्हणजे  जमीन हि  नापीक  होणे  व  त्या  मध्ये  कोणत्ये  पीक  किंवा  झाड  हे येत  नाही  जर  झाड  हे आल्ये असेल ते  भूमी  प्रदूषण आल्या नंतर दूषित  होत असते या  मुले जेथे  भूमी  प्रदूषण  हे  होते तेथून  सर्व  झाडे  हे  नसत्ये होत असतात. ५०% भूमी  चा भाग  हा  अन  बनवण्या साठी केला जातो  व  लोकसंख्या  वाढी  मुले  भूमी  वर  मोठ्या  प्रमाणात  ताण  दिला  जातो  व हे दिखील  मोठे  कारण  हे  भूमी  प्रदुषणा  चे आहे. 

प्रकाश प्रदुषण:- 

गरज  नसून  सुद्धा  मोठ्या  प्रमाणात  अति  प्रकाशमये   प्रकाश्याचा  उपयेगो  करणे  व  गरज नसताना  देखील  मोठ्या प्रमाणात  प्रकाशाची  उत्पत्ती  करणे  म्हणजे  प्रकाश  प्रदूषण होये.  प्रकाश  प्रदूषण  मुले  काही  फारसा  फरक  हा  पडत  नाही पण  शेहर  या  सारख्या  भाग  मधून  तारे  हे  दिसत  नाही  हे  वायू  प्रदूषण  मुले देखील  होउ  शिकते  पण  प्रकाश  प्रदूषण  मुले  मानवी  डोळ्या ना  त्रास  देखील होऊ  शिकतो. 

ध्वनी प्रदूषण;-

ध्वनी  प्रदूषण  म्हणजे  अन  उपयोगी  आवाज  हा मोठ्या  प्रमाणत  होणे म्हणजे  ध्वनी  प्रदूषण  असे  म्हणतात. ध्वनी  प्रदूषण  हे प्रामुख्याने गाड्या ,विमान  , ट्रेन  आणि   साऊंड  सिस्टीम  व  इतर  आवाज  तयार  करणारे  साधने  मुले  ध्वनी  प्रदूषण हे होते.हवाईअडा या  उले देखील  मोठ्या प्रमाणात  ध्वनी प्रदूषण  हे होत  असते या  मुले अनेक  रोग  हे  मानवानं  होतात  जसे कि हृदय रोग उच्ये  रक्त  दाब  पाचांसक्ती कमजोर होणे  व  खूप  ज्यादा  अनउपयोगी  आवाज  मुले  मानस  मध्ये  नेरॉटिक  मेंटल डिसऑर्डर या  सारखे अनेक  रोग  हे  ध्वनी  प्रदूषण मुले  होत असतात. सामान्य  ध्वनी  प्रदूषण  मध्ये  आवाजाची  शेमता  हि ३५ ते  ४५ इतकी  असते.  व  गाड्या ,विमान  व ट्रेन  या  सारख्या  साधनांची  शेमता  हि  ३५ ते  ४५  तुलनेत  खूप  जास्त  आहे.  

 
    

 

       

जागतिक पर्यावरण दिन

जागतिक पर्यावरण दिन

world environment day

अपल्याला  माहीतच  आहे  कि  पर्यावर  हि  किती  मोठी  समस्या  आहे  या  गोष्टी  मुले  जागतिक पर्यावरण दिन
हा  साजरा  केला  जातो   पर्यावर  हे   जर  कालांतराने  जर  नष्ट  होत  गेल्ये तर  पुथ्वी  या  ग्रहा  वर  राहणाऱ्या  जीवाचे  अस्तित्व  खतर्या  मध्ये येऊ  शिकते  या  मूल्येच  या  कारना  मुले  जागतिक पर्यावरण दिन  साजरा  करण्यास  सुरवात  झाली   world environment day  हे  जर  वर्षी  ५ जून ला  साजरा  केला  जातो 

जागतिक पर्यावरण दिन

जागतिक पर्यावरण दिन हा का साजरा केला जातो:-

जागतिक पर्यावरण दिन  हे  जर  वर्षी  ५ जूनला  साजरा  केला  जातो   हे साजरा  करण्या  माघील  कारण  म्हणजे दिवसान  दिवस   जगामध्ये   प्रदूषण  खूप  वाढत  आहे . या  मुले  अनेक  समस्या  निर्माण  झाल्या आहेत  जसे  कि  जयाक्तिक  तापमान  वाढ  तसेच  सजीवांना  स्वाश  घेण्या  मध्ये  अधचन येणे  यामुळे  हि  एक  जागतिक  पातळीवरची  मोठी  समस्या  निर्माण  झाली  आहे  या  मुले  लोकांमध्ये  पर्यावरण वाचवणे  हे किती  गरजेचे आहे या  विषयी  जागरूकता  निर्माण होण्या  साठी  तसेच  पर्यावरण  ची  रचना  कशी  आहे  पर्यावरण  कसे  काम  करते  हे  जाणून  घेणे  यासाठी  जागतिक  पर्यावरण  दिन  हा  साजरा  केला  जातो.    

जागतिक पर्यावरण दिनाचा इतिहास:-

जागतिक  पर्यावरण  दिन  ची  स्थापना  हि  १९७२ साली  संयुक्त राष्ट्र संघ  द्वारये  करण्यात  आली  आहे. स्टॉकहोम या  परिषद  च्या  वेळी  करण्यात  आले आहे. जी  कि  पहिली  विशीव  परिषद   होती  कि  त्या  मध्ये  मुखे पर्यावणाला  महत्व  दिले  होते   मानव  हे  चांगल्या  वातावरणा  मध्ये  जगने  हे  त्याचा  अधिकार  आहे  हे  समजले  व या  साठी   मूलभूत  मानवी  हक्क  बनवण्यात  आला  आहे. व  या मध्ये  पर्यावरण  निर्माण  साठी  मूलभूत  कार्येक्रम  करण्यास  सुरवात  झाली . 

जागतिक  पर्यावरण  दिन  हा  पहिल्यांदा  १९७४ या  वर्षी  साजरा  करण्यात  आला  होता. वर्षानुवर्षे  हा  एक  असा  दिवस  बनला  आहे  कि  त्या  मध्ये  पर्यावरण  संरक्षण  करण्याऱ्या  विविध  
लोकान साठी  जागतिक  पातळी  वरील  मंच  निर्माण  झाला  आहे  या  मध्ये   विविध  क्षेत्रा  मध्ये  काम  करणाऱ्या  लोकान मध्ये  जागरूकता  निर्माण   करणे  हे काम  आहे.

 वायू प्रदूषण,प्लास्टिक प्रदूषण,जागतिक तापमानवाद  व तसेच  समुद्रा  पाण्याच्या  पातळी मध्ये वाद अश्या  ह्या  पर्यावरण  मधील  समस्या  आहेत. जागतिक  पर्यावरन  दिन  हे  प्रत्येक  वर्षी  नवीन  देश  आयोजित  करत  असतो  व  त्या  वर्ष्यातील  प्रमुख  समस्या  व  नारयाची  वर्णन करत  असते. 

1974 मध्ये जागतिक पर्यावरण दिनाची थीम:-

१९७४  हे  वर्ष  या  वेळी पहिल्यांदा  जागतिक  पर्यावरण  दिनाची   सुरवात जाहली  होती  या  वर्षी   (only  one earth) अशी  थीम  होती  या  थीमचा  मुख्ये हेतू म्हणजे  लोकांना समजवणे  कि  आपण  ज्या  पुथ्वी वर  राहतो  ती  पुथ्वी  फक्त  एकच  आहे  वैन्यानिकांनी  अनेक   वेळा  दुसरी  पुर्थ्वी  सारखा  ग्रह  हुडकण्यासह  पर्येतन  केला  पण  दुसरा  ग्रह काय हि सापडला  नाही म्हणून  ह्या  थीम  च्या  सहारे  सांगणे होते कि  आपल्या  पुथ्वी  ला जपा . 


जागतिक पर्यावरण दिन 2022 थीम:-

२०२२ मध्ये  स्वीडन  हा  देश  जागतिक  पर्यावरण  दिनाला  होस्ट  करत आहे.  स्वीडन  या देशाने  होस्ट करण्याच्या  मानाने  त्या  देशाने  (only one earth ) असे  नाव  या थीम  ला  ठेवण्यात आल्ये आहे  या  थीम  चा मुख्य हेतू  असा  आहे  कि  पुथ्वी  हि  फक्त  एकच  आहे  व  या  पुथ्वीला  आपण  जोपासले  पाहिजे  अशीच  थीम हि  १९७४ या  पहिला  जागतिक पर्यावरण  दिन  निमित्त सुदा  ठेवण्यात अली होती. 

जागतिक पर्यावरण दिन 2023 थीम:-

२०२३ मध्ये  कोट डी’आयव्होर आणि  नेदरलँड   या  दोन  देशांनी  जागतिक  पर्यावरण दिन  हा  होस्ट  केला  कोट डी’आयव्होर आणि  नेदरलँड या  दोन  देशानी  (Beat Plastic Pollution) असे  या  वर्षी  च्या  थीम ला  नाव  ठेवण्यात  आले  प्लास्टिक प्रदूषणावर मात करा  अशी  हि  मोहीम  या  दोन  देशांनी   सर्व  जग भर चालवली  व  प्लास्टिक  प्रदूषण  कमी  कसे करता  येईल  यावर कोणते    येतील   या  साठी सर्व  देशांनी प्रयेतं केला पाहिजे  असे या  देशानी  थीम चालवली .