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कामाख्या देवी मंदिर

 कामाख्या देवी मंदिर   

  kamakhya devi temple

कामाख्या  देवी  मंदिर  हे  एक  शक्तिशाली   मंदिर  आहे  कामाख्या  देवी  मंदिर  हे  माता  सती  ला  समर्पित  आहे.  हे  मंदिर  ५१ शक्ती  पीठ  पैकी  एक  आहे   हे  मंदिर  ब्रह्मापुत्र  नदी  जवळ  आहे   या मंदिर  चे  अनेक  रहस्य  आहेत  ते  आपण  या  आर्टिकल  मध्ये  पहाणार  आहे. कामाख्या  देवी  मंदिर  हे  भारता  मध्ये  आसाम  या  राज्य च्या  राजधानी  गुवाहाटी  गोवती  या  ठिकाणी  मंदिर  हे  आहे . हे  मंदिर  नीलांचल पर्वत  रांगेमध्ये  वसले  आहे  डोगरा  मध्ये  असल्या  कारण  मुले  या  मंदिरास तांत्रिक शास्त्रात विशेष महत्त्व आहे. 

ज्या  वेळी  भगवान  शिव  व  माता  सती  यांचे  मिलन  झाले  होते  पण  हे  मिलन  माता  सती  यानच्या  वडिलांना  हे  मिलन   पसंद  न्हवते  कारण  सती  च्या  वडलांना  महादेव  हे  आवडत  नव्हते  म्हणून च  आपमाण करण्याच्या  भावनेने  सतीच्या  वडिलाने  एक  यद्न्य  चे  नियोजन  केलय  त्या  यद्न्य  ला  सर्व  देवी  दैवताला  आमंत्रण  दिले  पण  महादेव  व  देवी  सतीला  या  यद्न्य  चे  आमंत्रण  दिले  नाही  आमंत्रण  न  दिल्या कारण  मुले  देवी  चलबिचल  होण्यास  सुरवात  झाली  व   महादेव  ला  त्या  यद्न्य  ला  जाण्यास  साठी  विचारले   पण  महादेव  आमंत्रण  नसल्या  कारणांनी  नकार  दिला. 

 पण  माता  सती  स्वता  जाण्याचे  विचारले  महादेवानी त्या  साठी  परवानगी  दिले  व  माता  सती  त्या  यद्न्य   मध्ये  गेली  व  सतीने  वडलांना  विचारले  कि  महादेवाना   का  आमंत्रण  दिले  नाही  पण  माता  सती च्या  वडलांनी  सर्व  देवी  व देवांच्या  पुढे  महादेवानाचा  खूप  आपमान केला  या  मुळे  देवी  सतीना  खूप  राग  आला  व  त्या  यद्न्य  च्या  अग्नी  मध्ये  आपले  शरीर   समर्पित  केले 

 हे  सगळे  महादेवन  त्यांच्या  शेकती  मुले  कळाले  व महादेव  तिढे  आलये  व  हे  बगताशनी  महादेव  खूप  राग  व  दुखी  झाले  व  सती  चे  पार्थिव  शरीर हे  हाताने  उचलये  व  त्यांनी  तांडव  करण्यास  सुरवात  केली  ते  शरीर  घेऊन  पूर्ण  अवकासातून  फिरू  लागले  या  मुले  त्यांचे  कर्तव्ये  विसरले  व  सुर्ष्टी  वर  ठोका  निर्माण  होण्यास  सुरवात  झाली

  या  मुले  विषुनु  देवांनी  न  दिसणारे  सुदर्शन  चक्र  हे  त्या  सतीच्या  पार्थिव  शरीरावर सोडले  या  मुले  त्या  शरीराचे   तुकडे  झाले  व  हे तुकडे  पुथ्वी  वर  पडले  असे  ऐकून  ५१  तुकडे  पुथ्वी  वर  पडले  व  हे तुकडे  ज्या  ठिकाणी  पडले  त्या ठिकाणास  ५१ शक्ती  पीठ  असे  म्हणतात  व  कामाख्या देवी  मंदिर  हे   या  सक्ती  पीठ  मधील  एक  आहे  येथे  माता  सती  ची  योनी  चा भाग  पडला  होता  व  या  मंदिर   मध्ये योनी ची  पूजा  हि  केली  जाते.  या  योनीतुन  कायम  जल  प्रवाभीत  होत  असते  

पण  ज्या  अम्बुवाची पर्वाच्या काळात देवी भगवती रजस्वला होते व  या काळात  योनी  मधून  पाण्याच्या  ठिकाणी  लाल  पाणी  वाहते  या  वेळी  मंदिरा  मध्ये  एक  पांढरा  कपडा  ह्या  ठिकाणी  सोडला  जातो  व हे  मंदिर  त्या काळात  पूर्ण पने  बंद  असते.  या  वेळी  ब्रहम्पुतर  नदी सुदा  पूर्ण  लाल  होत  असते  ज्या  वेळी  हा  काळ  समतो  व  मंदिर  उघडले  जाते  त्या  वेळी   तो  कपडा  पूर्ण  पने लाल  झाला  असतो हा  कपडाच  भक्ता  मध्ये  प्रसाद  म्हणून  वाटला  जातो.           

  

पर्यावरण प्रदूषण

 पर्यावरण प्रदूषण

 environmental pollution

पर्यावरण  प्रदूषण  हे  जगभर  सगळ्यात  मोठी   समस्या  झाली  आहे. या  मध्ये  पर्यावरण  प्रदूषण  चे  अनेक  प्रकार  आहे  ते आपण पहाणार आहोत   या  आर्टिकल मध्ये  environmental pollution म्हणजे  नेमके  काय  आहे    पर्यावरण  प्रदूषण  म्हणजे  जे  पर्यावरण  नैसर्गिक आहे  त्या मध्ये  बदल  होणे. 

वायू , जल व  स्थल  व  आणि  माती  या  साधताना  मध्ये  बदल  होणे  जसे  कि रासयनिक  व  जैविक   या  मधील  असा  बदल  होणे  कि  जो  मानव  व  इतर  जीव  जंतुना  आणि  झाडे  याना  नुकसान  होणे   यालाच  पर्यावरण प्रदूषण  असे  म्हटले  जाते .  पर्यावरण   या  मध्ये  अनेक  वायू  म्हणजेच  गॅस चा  समावेश  आहे.  हे  गॅस  म्हणजे  ऑक्सिजन , कार्बनडायॉक्सिड व  इतर  गॅसेस , व  नाइट्रोजन   हे  आहेत .  पण  पर्यावरण  मध्ये  मुख्येतू  नायट्रोजन  चा  समावेश  असतो  व  त्याच्या  झालो खाल ऑक्सिजन  आणि  कारबंडायऑक्सिड हे  खूप  अल्प  प्रमाणात  वातावरण  मध्ये  असते  हे  च   कार्बनडायऑक्सिड ज्या  वेळी  मानवाच्या  काही  क्रिया  मुले  वाढते  त्यात  काही  बदल  होणे  व  तसेच  जल  मध्ये  काही  तत्वान मध्ये  बदल  होणे  याला  पर्यावरण  प्रदूषण  असे  म्हणतात. 

प्रदूषणाचे प्रकार:-

 पर्यावर  हे  अनेक  बढतीने  दूषित होत  असते  जसे  कि  वायू , जल  व  माती  हेच   पर्यावण   चे  मुख्ये खडक  आहेत व या मध्ये  प्रामुख्याने   प्रदूषण  करण्या  मध्ये  मानवाचा  मोठ्या  प्रमाणात  हात  आहे  पर्यावरण   मध्ये   मुख्ये   नेमके पाच   प्रदूषण  चे  प्रकार कोणते  आहेत  हे  आपण    पहाणार  आहे. 

वायू प्रदूषण:-

वायू प्रदूषण  हे  वातवरण  मध्ये  अनेक  वेग  वेगळे  घटक  येतात  व  यामुळे  वातावरणा  मध्ये  समतोल  राहत  नाही  म्हणजेच   नैसर्गिक  हवनामध्ये  बदल  होणे  वायू  प्रदूषण  हे  कार्बनमोनोऑक्सिड, सल्फरडायॉक्सिड,कोरोफ्लोरोकार्बन व  नायट्रोजन  ऑक्सिड  जे  कि  मोटर  वाहन  मधून  न  निर्माण  होत असते या  गॅसेस  मुळे  वायू  प्रदूषण  होते  वायू  प्रदूषण  हे मुख्येतू  कार  हे  वाहन  बनवणारी  कंपनी   जी कि  सर्वात मोठ्या  प्रमाणात  कार्बनऑक्सिड हे  वातवरण मध्ये  सोडते . वायू  प्रदूषण  मुले  प्राण्यांना  व  मनावना  त्रास  होतो  मानव  मध्ये  मुख्येतू  श्वास  घेण्या  मध्ये अधचन  हि येत असते. 

जल प्रदूषण:-

कारखानो  मधून  किवा  किवा  अन्य  इतर  कोष्टी  मधून  दूषित  पाणी  व  रसायने  हे  नदी  , तलाव  व  समुद्रा  मध्ये  सोडल्या  मुले  सर्व  चांगल  पाणी  हे मोठ्या  प्रमाणात दूषित  होते  यालाच  जल  प्रदूषण  म्हणतात. वायू  प्रदूषणा  या कारना  मुळे दूषित  गॅस  व   कण  पाऊसा च्या  पाण्या  मध्ये  मिसळणे  याला  आपण   ऍसिडिक  रेन असे  म्हणतो.  या  अम्लीय  वर्षा  मुळे  दिखील  जल  प्रदूषण  हे मोठ्या  प्रमाणात  होत  असते. पेट्रोल  व  दिझेल  याची  आयात  व  निर्यात  हि  समुद्रा  मार्गी  होत  असताना  त्या  मध्ये  जहाज  मधून  पेट्रोल  व डिझेल  याची गळती  होणे  किंवा  ते  जहाज  दुर्घटनाग्रस्त  होणे  या मुले  देखील  जल  प्रदूषण  मोठ्या प्रमाणात  होते  व  या  मुले  समुद्रा  मधील  जीवन  धोका  निर्माण  होतो. जल  प्रदूषणा  मध्ये सगळ्यात  अग्रेसर  देश  हा चीन  आहे चीण   मध्ये  मोठ्या प्रमाणात  जल  प्रदूषण  होत असते.  

भूमी प्रदूषण:-

ठोस  कचरा  हा  जमनी  वर  खूप  दिवसा  पासून  साठवून  ठेवणे   तसेच  जमनी  वर  मोठ्या  प्रमाणात  कीटक  नाशकातचा  वापर  करणे  यालाच  भूमी  प्रदूषण  असे म्हणतात. भूमी  प्रदूषण  म्हणजे  जमीन हि  नापीक  होणे  व  त्या  मध्ये  कोणत्ये  पीक  किंवा  झाड  हे येत  नाही  जर  झाड  हे आल्ये असेल ते  भूमी  प्रदूषण आल्या नंतर दूषित  होत असते या  मुले जेथे  भूमी  प्रदूषण  हे  होते तेथून  सर्व  झाडे  हे  नसत्ये होत असतात. ५०% भूमी  चा भाग  हा  अन  बनवण्या साठी केला जातो  व  लोकसंख्या  वाढी  मुले  भूमी  वर  मोठ्या  प्रमाणात  ताण  दिला  जातो  व हे दिखील  मोठे  कारण  हे  भूमी  प्रदुषणा  चे आहे. 

प्रकाश प्रदुषण:- 

गरज  नसून  सुद्धा  मोठ्या  प्रमाणात  अति  प्रकाशमये   प्रकाश्याचा  उपयेगो  करणे  व  गरज नसताना  देखील  मोठ्या प्रमाणात  प्रकाशाची  उत्पत्ती  करणे  म्हणजे  प्रकाश  प्रदूषण होये.  प्रकाश  प्रदूषण  मुले  काही  फारसा  फरक  हा  पडत  नाही पण  शेहर  या  सारख्या  भाग  मधून  तारे  हे  दिसत  नाही  हे  वायू  प्रदूषण  मुले देखील  होउ  शिकते  पण  प्रकाश  प्रदूषण  मुले  मानवी  डोळ्या ना  त्रास  देखील होऊ  शिकतो. 

ध्वनी प्रदूषण;-

ध्वनी  प्रदूषण  म्हणजे  अन  उपयोगी  आवाज  हा मोठ्या  प्रमाणत  होणे म्हणजे  ध्वनी  प्रदूषण  असे  म्हणतात. ध्वनी  प्रदूषण  हे प्रामुख्याने गाड्या ,विमान  , ट्रेन  आणि   साऊंड  सिस्टीम  व  इतर  आवाज  तयार  करणारे  साधने  मुले  ध्वनी  प्रदूषण हे होते.हवाईअडा या  उले देखील  मोठ्या प्रमाणात  ध्वनी प्रदूषण  हे होत  असते या  मुले अनेक  रोग  हे  मानवानं  होतात  जसे कि हृदय रोग उच्ये  रक्त  दाब  पाचांसक्ती कमजोर होणे  व  खूप  ज्यादा  अनउपयोगी  आवाज  मुले  मानस  मध्ये  नेरॉटिक  मेंटल डिसऑर्डर या  सारखे अनेक  रोग  हे  ध्वनी  प्रदूषण मुले  होत असतात. सामान्य  ध्वनी  प्रदूषण  मध्ये  आवाजाची  शेमता  हि ३५ ते  ४५ इतकी  असते.  व  गाड्या ,विमान  व ट्रेन  या  सारख्या  साधनांची  शेमता  हि  ३५ ते  ४५  तुलनेत  खूप  जास्त  आहे.  

 
    

 

       

जागतिक पर्यावरण दिन

जागतिक पर्यावरण दिन

world environment day

अपल्याला  माहीतच  आहे  कि  पर्यावर  हि  किती  मोठी  समस्या  आहे  या  गोष्टी  मुले  जागतिक पर्यावरण दिन
हा  साजरा  केला  जातो   पर्यावर  हे   जर  कालांतराने  जर  नष्ट  होत  गेल्ये तर  पुथ्वी  या  ग्रहा  वर  राहणाऱ्या  जीवाचे  अस्तित्व  खतर्या  मध्ये येऊ  शिकते  या  मूल्येच  या  कारना  मुले  जागतिक पर्यावरण दिन  साजरा  करण्यास  सुरवात  झाली   world environment day  हे  जर  वर्षी  ५ जून ला  साजरा  केला  जातो 

जागतिक पर्यावरण दिन

जागतिक पर्यावरण दिन हा का साजरा केला जातो:-

जागतिक पर्यावरण दिन  हे  जर  वर्षी  ५ जूनला  साजरा  केला  जातो   हे साजरा  करण्या  माघील  कारण  म्हणजे दिवसान  दिवस   जगामध्ये   प्रदूषण  खूप  वाढत  आहे . या  मुले  अनेक  समस्या  निर्माण  झाल्या आहेत  जसे  कि  जयाक्तिक  तापमान  वाढ  तसेच  सजीवांना  स्वाश  घेण्या  मध्ये  अधचन येणे  यामुळे  हि  एक  जागतिक  पातळीवरची  मोठी  समस्या  निर्माण  झाली  आहे  या  मुले  लोकांमध्ये  पर्यावरण वाचवणे  हे किती  गरजेचे आहे या  विषयी  जागरूकता  निर्माण होण्या  साठी  तसेच  पर्यावरण  ची  रचना  कशी  आहे  पर्यावरण  कसे  काम  करते  हे  जाणून  घेणे  यासाठी  जागतिक  पर्यावरण  दिन  हा  साजरा  केला  जातो.    

जागतिक पर्यावरण दिनाचा इतिहास:-

जागतिक  पर्यावरण  दिन  ची  स्थापना  हि  १९७२ साली  संयुक्त राष्ट्र संघ  द्वारये  करण्यात  आली  आहे. स्टॉकहोम या  परिषद  च्या  वेळी  करण्यात  आले आहे. जी  कि  पहिली  विशीव  परिषद   होती  कि  त्या  मध्ये  मुखे पर्यावणाला  महत्व  दिले  होते   मानव  हे  चांगल्या  वातावरणा  मध्ये  जगने  हे  त्याचा  अधिकार  आहे  हे  समजले  व या  साठी   मूलभूत  मानवी  हक्क  बनवण्यात  आला  आहे. व  या मध्ये  पर्यावरण  निर्माण  साठी  मूलभूत  कार्येक्रम  करण्यास  सुरवात  झाली . 

जागतिक  पर्यावरण  दिन  हा  पहिल्यांदा  १९७४ या  वर्षी  साजरा  करण्यात  आला  होता. वर्षानुवर्षे  हा  एक  असा  दिवस  बनला  आहे  कि  त्या  मध्ये  पर्यावरण  संरक्षण  करण्याऱ्या  विविध  
लोकान साठी  जागतिक  पातळी  वरील  मंच  निर्माण  झाला  आहे  या  मध्ये   विविध  क्षेत्रा  मध्ये  काम  करणाऱ्या  लोकान मध्ये  जागरूकता  निर्माण   करणे  हे काम  आहे.

 वायू प्रदूषण,प्लास्टिक प्रदूषण,जागतिक तापमानवाद  व तसेच  समुद्रा  पाण्याच्या  पातळी मध्ये वाद अश्या  ह्या  पर्यावरण  मधील  समस्या  आहेत. जागतिक  पर्यावरन  दिन  हे  प्रत्येक  वर्षी  नवीन  देश  आयोजित  करत  असतो  व  त्या  वर्ष्यातील  प्रमुख  समस्या  व  नारयाची  वर्णन करत  असते. 

1974 मध्ये जागतिक पर्यावरण दिनाची थीम:-

१९७४  हे  वर्ष  या  वेळी पहिल्यांदा  जागतिक  पर्यावरण  दिनाची   सुरवात जाहली  होती  या  वर्षी   (only  one earth) अशी  थीम  होती  या  थीमचा  मुख्ये हेतू म्हणजे  लोकांना समजवणे  कि  आपण  ज्या  पुथ्वी वर  राहतो  ती  पुथ्वी  फक्त  एकच  आहे  वैन्यानिकांनी  अनेक   वेळा  दुसरी  पुर्थ्वी  सारखा  ग्रह  हुडकण्यासह  पर्येतन  केला  पण  दुसरा  ग्रह काय हि सापडला  नाही म्हणून  ह्या  थीम  च्या  सहारे  सांगणे होते कि  आपल्या  पुथ्वी  ला जपा . 


जागतिक पर्यावरण दिन 2022 थीम:-

२०२२ मध्ये  स्वीडन  हा  देश  जागतिक  पर्यावरण  दिनाला  होस्ट  करत आहे.  स्वीडन  या देशाने  होस्ट करण्याच्या  मानाने  त्या  देशाने  (only one earth ) असे  नाव  या थीम  ला  ठेवण्यात आल्ये आहे  या  थीम  चा मुख्य हेतू  असा  आहे  कि  पुथ्वी  हि  फक्त  एकच  आहे  व  या  पुथ्वीला  आपण  जोपासले  पाहिजे  अशीच  थीम हि  १९७४ या  पहिला  जागतिक पर्यावरण  दिन  निमित्त सुदा  ठेवण्यात अली होती. 

जागतिक पर्यावरण दिन 2023 थीम:-

२०२३ मध्ये  कोट डी’आयव्होर आणि  नेदरलँड   या  दोन  देशांनी  जागतिक  पर्यावरण दिन  हा  होस्ट  केला  कोट डी’आयव्होर आणि  नेदरलँड या  दोन  देशानी  (Beat Plastic Pollution) असे  या  वर्षी  च्या  थीम ला  नाव  ठेवण्यात  आले  प्लास्टिक प्रदूषणावर मात करा  अशी  हि  मोहीम  या  दोन  देशांनी   सर्व  जग भर चालवली  व  प्लास्टिक  प्रदूषण  कमी  कसे करता  येईल  यावर कोणते    येतील   या  साठी सर्व  देशांनी प्रयेतं केला पाहिजे  असे या  देशानी  थीम चालवली . 

 




 

History of Ayodhya Ram Temple: Construction Process and Supreme Court Decision

History of Ayodhya Ram Temple: Construction Process and Supreme Court Decision

अयोध्या राम मंदिर का इतिहास: निर्माण प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

या  आर्टिकल  मध्ये   आपण  अयोध्या  राम  मंदिर   बदल  बघणार  आहे   अयोध्या  हे  राम  ह्या  हिंदू  देवाची   जन्मभूमी  आहे   तर  आपण    अयोध्या    राम  मंदिर हे  नेमके   कसे  तयार  झाले  या आर्टिकल  मधून  आपण  त्याचा   इतिहास  बदल  व  अनेक  घटका  बदल  माहिती  घेणार  आहे. 

अयोध्या राम मंदिराचा इतिहास

प्रमुख समर्पण:

हे  मंदिर   भगवान   राम    ला  समर्पित  आहे   या   देवाला  हिंदू  धर्मा  मधील  प्रमुख  देव  पैकी  एक  देव  मानले  जाते  राम  हा  देवा  जीवनाची  गोष्टी  पासून   प्रत्येक  लहान  मुलान  मध्ये  सुदा  माहिती  आहे. वाल्मिकिींनी  या   ऋषी   ने  लिहलेले   रामायण  या  महाकाव्ये   मधील   नायक  म्हणजे   राम  श्री  राम  हे  भगवान  विष्णू  यांचे  सातव्ये  मनुष्य  रुप  मधील  अवतार  होते. भगवान  राम   याना  पुरुषोत्तम  असे  म्हटले  जाते.  भगवान  राम  चा  जन्म  हा  अयोध्या  मध्ये  झाला  होता  हे  मंदिर  त्यांच्या  जन्म  ठिकाण  म्हणून  समर्पित  आहे . 

 राम  मंदिराचा  इतिहास :

राम  मंदिरा  ची  कहाणी  हि  ज्या  वेळी  भगवान  राम  हे  आपले  जीवन  पाण्या  मध्ये  समाधी  घेऊन  विखुटाला  जातात  त्यापासून  सुरवात होते  राम  हे  विखुटाला  गेल्या  पासून  त्यांच्या  ४४  पिढीने  राज  केले  होते   भगवान  राम  यांचे  पुत्र    खुश  अयोध्याचे  राज्या  होत्ये त्या वेळी  भगवान  राम  यांच्या  जन्म  ठिकाणी एक  मंदिर  बांधले . हे  मंदिर  अनेक  वर्ष  झाल्या मुले  ५७ bc या कालखंड  मध्ये उजन चे  राज्या  विक्रम  आदित्य या  नुततीकरण  केले  पण  परत  एप्रिल १५२६  या  कालखंडा   मध्ये  बाबर  हा  मुस्लिम  राज्या  भारता  मध्ये  आला  याने  ज्या वेळी  अयोध्या  वर  हला  केला  त्या वेळी  त्याच्या  सेनापती  ला  आदेश  दिला कि  तेथील  सर्व  मंदिर  तोडून   त्या  ठिकाणी  मजित  बाडण्यात  आल्या  व  त्या  ठिकाणी  हिंदू  ना  जाण्यास  वर्जित  केले  

१८५३ या  साला  मध्ये   निर्मोहा  एखादा  याने  दावा  केला  कि  या  मजित  जागे  राम  मंदिर  होते   व  मंदिर  तोडून  या ठिकाणी  मजित  बांधली  आहे.  या  मुले  मुसलीम  व  हिंदू  मध्ये  वादास  सुरवात  झाले   व  अनेक  दंगली  सुरवात  झाली.  पण  परत  हि  केस   कोर्टा  मध्ये  जाते  व  या  मध्ये  दोन  पक्ष  वेगवेगळे  आप आपला  दावा  ढोकतात  हे  दोन  पक्ष  म्हणजे  निर्मोह  एखादा  व  सुनी वक्त  बोर्ड  परत  या  मध्ये अनेक  संघटना  ह्या  एकत्र   येण्यास सुरवात  होते  ३० ऑकटोम्बर  १९९२ या मढी    हाजरो  च्या  संख्येने  कार  सेवक  एकत्र  येतात  व  मजित  च्या  चबुतऱ्या वर चडून  बाबरी  मजित  खाली  पाडता  व  त्या  ठिकाणी  एक  छोटे  राम  ची मूर्ती  ठेवली  जाते  या  मुले  हिंदू  व  मुस्लिम  मध्ये  अनेक  दंगे  होण्यास  सुरवात  होते   व  परत  हा  विषय  सुप्रीम कोर्ट  मध्ये  जातो . 

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय

एरोकॉलॉजिकल   सुरेव्य  ऑफ  इंडिया   या    रिपोर्ट  नुसार  असे  नमूत  केले  गेले  कि   त्या  ठिकाणी  माती  खणून  त्या  मदत  अवशेष  बाहेर  काढून  ते  नेमके  मजित  चे  आहेत कि   मंदिर  चे  असे करण्यास  कोर्टाने  आदेश  दिला  त्या  रिपोर्ट  मध्ये  राम  मंदिर  आधी  असण्यास  सिद्ध  झाले  व    बाबर  या  मुस्लिम  शासक  मंदिर  तोडून  बाबरी  मजित    बदलाचे सिद्ध  झाले.  याच्या आधारे  सुप्रीम  कोर्टाने  भारताच्या  संविधान  मधील आर्टिकल  १४२  नुसार असा  न्याय  केला  कि  बाबरी  मजित  वाल्या  २. ७७ एकरी  ठिकाणाला राम  लळा  विराजमान  ला  राम  मंदिर  बांधण्यास  देण्यात  आले. व  दुसऱ्या  ठिकाणी  ५ एकरी  जमीन  हि  सुनी  वक्त  बोर्ड  ला  बाबरी  मजित  बांधण्यास  दिली.  

राम  मंदिराची निर्माण की प्रक्रिया

अयोध्या राम  मंदिराचा  एकूण  परिसर  हा  १०७ एकर  मध्ये  पसरला  आहे  त्या  मधील  मूळ  राम  मंदिर हे  २,७७ एकर  मध्ये  पसरले  आहे  त्या  मंदिरा  ची  लांबी  ३८० पाय  व रुंदी  २५० आहे  आणि  मंदिर  एकूण  १६१ फूट आहे व  या  मंदिराला  एकूण  ३९२  पिलर्स  व ४४ दरवाजे  आहेत  मंदिरा  ची  इट  बनवताना  इट  वर  श्री  राम  व  इट  बनवनचे  वर्ष  त्या इट  वर  नमूत  केले  आहे  या  मागे  राम सेतू  सारखी  भावना  होती तसेच  या मंदिरा  मध्ये  लोखंडचा  वापर  केला  नाही पण  तरी  देखील  आता  परची  बेस्ट  तंत्रन्यान  वापरलं  आहे  हे  मंदिर  मंदिर  जुनी  पद्धतीने  म्हणजेच  जे  हिंदू  धर्मा  मध्ये  मंदिर  बांधाचे  नियम  आहेत  त्या पद्धीतीं  ने  मंदिर  बांधले  आहे. या  मंदिर  मध्ये  पिंक सॅन्डस्टोने  नावाची  दगड  वापरला  आहे  तसेच  या  मंदिराला  असे  बनवले  आहे कि  ८ मॅग्नीतूड  भूकंपाने  देखील  या  मंदिराला  काही  होणार नाही  ह्या  मंदिराला  १००० वर्ष पर्येंत हे  मंदिर  जसे तसे राहील.

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supreme court ram mandir judgement pdf 



 






  

हवामान बदल काय आहे?

 हवामान बदल काय आहे

  what is climate change

नेमकी  हवामान  बदल  काय  आहे  हे  याची  संकल्पना  बघणार  आहे   climate change  हि  संकल्पना  अशी आहे कि  आपण ज्या  ग्रह  वर  राहतो  म्हणजे  पुथ्वी  या ग्रह चे  तापन  हे वाढत  असते  व  या  मुले हवामान मध्ये अनेक  बदल  घडत  असतात  हवामान  सजीवांना  साठी  रहाण्या  यौग्य  रहात  नाही  त्यास  हवामान  बदल  काय आहे  असे   संम्बोदले  जाते.

आपण  ज्या ग्रहा वर राहतो  त्या  ग्रह  चे  नाव  पुथ्वी. सजीव  हे  पुथ्वी  मध्ये  जगण्या  साठी   सहजीवन  साठी  निरगोई  हवामान ची  गरज  असते  आपल्याला  हे  माहीत  च  आहे  कि  पुथ्वी  या ग्रहा  शिवाय  इतर  कोणत्या  हि  ग्रह  वर  पुथ्वी  सारखे  सजीव साठी  राहण्या  योग्य वातावरण  नाही. 

पुथ्वी  या ग्रह  चे   तीन  प्रमुख  वायू  मुले  वातावरण  हे  तयार  झाले  आहे.  ते  म्हणजे  ऑक्सिजन , नायट्रोजन  व  कार्बनडायॉक्सिड आणि  इतर  वायू   या वायू  चे  प्रमाण  हे असे  आहे कि  ऑक्सिजन  हे  २१%  , नायट्रोजन   हे  ७८% व  कार्बनडायॉक्सिड  आणि   इतर  वायू  चा   समावेश  हा  ०. ०३%  एवढा  आहे.

 पण  १९५०  पासून   कार्बनडायॉक्सिड  चे  प्रमाण  हे  वातवरण  मध्ये  वाढत  चाले  आहे.  हे  प्रमाण  आता  किमान  ०. ०४% एवढे  झाले  आहे   वैन्यानिक  दुष्ट्या   याचे  ९६% कारण  हे  मानवी  क्रियाकलाप  आहे.  आपण   खूप  असे  हवामानाला  दूषित  करत  असतो जसे   कि  कोयीला  हा  आपण  ऊर्जा  साठी  जाळतो  , कारखाना  , काडी  चालवणे  या  मुले  co2 चे   प्रमाण  हे  वाढत  आहे . आणि  दुसरे  कारण  म्हणजे  आपली  मानवाची  संख्या  हि  वाढत  चाली  आहे. 

 त्या  मुले आपण  ज्यास्त  नैसर्किक  खणिज्याचा  वापर  होतो  हे  देकील एक  मोठे कारण  आहे. समस्या  हि  कि  नाही  तापमान  हे  वाढत  आहे पण  हे  मोठ्या  प्रमाणत  तापमान मध्ये  वाढ  होत  आहे  या  मुले  हिमालया  या  सारख्या  बर्फ  असणाऱ्या  प्रदेश  मधील  बर्फ  खूप  वेगाने   वितळत  आहे 

 या  मुले  समुद्रया  किनारी  असलेले   ठिकाण  हे  पाण्या  खाली  जाण्याचा  धोका  निर्माण  झाला  आहे .  या  मुले  हवामान  बदल  हे  विषयी  गंभीर  घेण्याची  गरज  आहे .  

हवामान बदल: कारणे, परिणाम:- 

हवामान  बदल  म्हणजे  पुथ्वी चे   वातावरण  हे   काहीये  मानवी   क्रियालाप   मुले  हवामान  मध्ये  बदल होणे  जशी कि   तापानं  वाढणे   हवा दूषित  होणे   या   श्वास  घेण्यास  अधतला  येणे  याचे  अनेक  करणे व  परी नाम  हे  आहेत  हे  मुखे  कोणते  कारण  व  परिणाम  आहेत  हे  आपण पाहू. 

गरम तापमान:-

पुथ्वी  चे तापमान  हे  दिवसानुदिवस  वाढत  चालये  आहे.  याचे  मुख्ये कारण  म्हणजे  मानवी  गतविधी  आहेत  या  मध्ये  मुखतो  तापमान  वाढण्या  प्रमुख  घटके  म्हणजे  कारखानये , वाहन  चे वाढते  प्रमाण  तसेच  ऊर्जा  मिळण्या  साठी  कोईल  या  खनिजाचा  मोठ्या  प्रमाणत  वापर  होण्ये  या  मूल्ये  वातावरणा  मधील  कॅर्बोनडिओक्सिड  चे   प्रमाण  हे वाढत चालये आहे. 

अधिक तीव्र वादळे:-

उष्मा-सापळ्यातील वायूंच्या मानवी उत्सर्जनामुळे   हवामान  मध्ये  अनेक  बदल  घडतात  जसे  कि  अधिक  तीव्र  वादळ  याचे  कारण  म्हणजे  आपण  जे  वायू  सोडत  ते वायू  मुले  पुथ्वी  समुद्र  मधील तापमान हे वाढत  जाते  व  समुद्रा  वाढती  पातळी  मुले   पूर येण्याचा  धोका  देखील  निर्माण  झाला  आहे हवामान  बदल मुले  अधिक  वादळे  हे येत  आहेत   तसेच  ते अधिक  तीव्र  प्रमाणात  येत  आहेत  या  मध्ये  वाऱ्याची  वेग हा ३५mp  हा  २४ तास  मध्ये   वाढत  आहे  या  मुले  वादळे  हे  अधिक  तीव्र  होत  आहेत.

प्राण्यांमधील प्रजाती नष्ट होणे:-   

हवामान  बदलामुळे   प्राण्यांमधील   प्रजाती  नष्ट  होत  आहेत.  आपल्या  पुथ्वी  या  ग्रहाचे  तापमान  गेले  दहा हजार वर्षा  पासून  तापन  हे  वाढत  आहे  त्यामुळे  तापमान  मधील  वाढी  मुले  हवामान  मध्ये  बदल  होत आहे  ऋतू  मध्ये  बदल  खडण्यास  सुरवात  झाली  आहे  त्यामुळे   प्रजातींना नवीन हवामान पद्धतींशी जुळवून घेणे  कठीण  जाते  त्या  मुले  प्रजाती  नष्ट  होत  आहेत. व  बियाणे विखुरण्यासाठी प्राण्यांवर अवलंबून असलेल्या वनस्पती हवामानातील बदलांशी जुळवून घेण्यासाठी धडपडत आहेत. हवामानातील बदलांशी जुळवून घेण्याची वनस्पतींची क्षमता काही प्रमाणात त्यांच्या बिया पसरवणाऱ्या प्राण्यांवर अवलंबून असते – ग्रह तापत असतानाही झाडे आणि फुलांना नवीन ठिकाणी उगवण्याची संधी मिळते जिथे त्यांना आवश्यक तापमान आणि पाऊस मिळू शकतो. 

अधिक आरोग्य जोखीम:-

हवामान  बदल   मुळे   मानवी  जीवन  साठी  खूप  मोठा  धोका  निर्माण  झाला  आहे   जाकतीक  तापमान  वाढीमुळे   तापमान  मुले  अनेक  रोगांची  लागण  हि  मानवना  होत असते जसे कि  डेंगू  ताप  या  सारख्या  डास पासून  पसणारे  रोग व  जलजन्य  रोगांसाठी  अनुकूल  परिस्थिती  निर्माण  होत  आहे  व  त्यामुळे  अनेक  नवीन भौगोलिक भागात   याच  शिरकाव  होतो  व  त्यामुले तेथील  लोकांची   रोग प्रतिकारशक्ती  विकसित  नसते  या मुले  जर वर्षी अनेक  लोकांचा  मूर्तीव  हा  होत  आहे  म्हणून  हवामान  बदल  मुले  अधिक  आरोग्य  जोखीम   चा  धोका  निर्माण  झाला  आहे . 

हवामान बदलाचे उपाय:-

हवामान  बदल  हि  एक  जगातील  सर्वात  मोठी  समस्या  निर्माण  झाली  आहे.  याचे  उपाये शोधणे खूप  महत्वाचे  झाले  आहे   हवामान  बदल हा  खूप वेगाने  होत  आहे त्यामुळे    २०५०  मधील  पिढी    हे  जग  बघील  का नाही   हे  देखील  सांगता येत  नाही  यामुळे  हे  कोठे तर  थाबवणे  गरजेचे  आहे. 

जीवाश्म इंधन जमिनीत ठेवा

हवामान  बदल  जर  हि  जर  समस्या  सम्पवेची  असेल  तर  आतापर्येंत  वापर  न  केलेले  तेल ,कोळसा  आणि  वायू  चे  साठे  हे विकसित  करणे  हे  थांबावे  लागेल.  वाढत्या  जागतिक  तापमान  वाढी  मुले  हे  साठे  वापरेचे  थांबवायचे  त्वरित  गरज  आहे.  दिवसेनदिवस  तापमान  हे वाढत च  चाले  आहे  त्यामुळे  जीवाश्म इंधन  ला  पर्याय  शोधून  जीवाश्म इंधन  हे  जमिनीत  ठेवणे  हाच  एकमात्र  मार्ग  आहे. 

Amazon सारख्या जंगलांचे रक्षण करा

ऍमेझॉन  या  जंगल  पुथ्वी  चे  फुफुसे  अशे देखील  संभोडले  जाते  कारण  हे  जंगल  जगातील  सगळ्यात  मोठे  जंगल  आहे  हे  जंगल  किमान  १५%  ऑक्सिजन  हे  जंगल  पुरवत  असते   पण   हे जंगल  आता थोडे  नष्ट  होत  चाले  आहे  कारण यावर्षी 20 ऑगस्ट रोजी ब्राझीलच्या साओ पाउलो शहरात अंधार पडला होता. हजारो किलोमीटर दूर असलेल्या ॲमेझॉनच्या जंगलात लागलेली भीषण आग हे त्याचे कारण होते, ज्याचा धूर आसपासच्या भागात पसरला होता.  जंगलतोड आणि कमी होत चाललेले वनक्षेत्र याबद्दल दीर्घकाळ चिंता व्यक्त करत आहे.  या  मुले  अमझोन  सारख्या  जंगलांचे  रक्षण  करणे  गरजेचे  आहे. 

महासागरांचे रक्षण करा

महासागरांचे  आपल्या  जीवना  मध्ये  खूप  महत्व  आहे  महासागरामुळे  पावसाचे  चेकर  चालत  असत्ये   तशेच  मानवाचे  अनाचा  मुख्य  भाग  हा  महासागरा  मधून  येत असतो जसे  कि सीफूड हे प्रथिनांचे प्रमुख स्त्रोत आहेत. महासागर आपल्याला इतर महत्त्वाचे अन्न स्रोत देखील प्रदान करतात, जसे की समुद्री शैवाल आणि समुद्री मीठ. जर  महासागर  नष्ट  झाले  तर  जागतिक  अन्न  सुरेशा  हि  धोक्यात  येण्यास सुरवात  होत्या  महासागर  आजकाल  खूप  प्रदूषण  होण्यास  सुरवात  झाली  आहे  महासागर  मध्ये  अनेक  कचरा  तशेच  माल  वाहतुकी  जहाजे  पासून लीक  होण्याऱ्या  कच्या  तेल  पासून   महासागर  मधील  जीवन धोका निर्माण होत चाला  आहे  यामुळे  महासागराचे  रक्षण  करणे  गरजेचे  आहे.   

हरीत ऊर्जा

हरित ऊर्जा हि एक अशी ऊर्जा आहे कि ती मानव जाती ला व पर्यावण अजिबात धोकायची नाही त्यामुळे जीवाश्म इंधन जर वापर करायच नसेल हरित ऊर्जा हा एक महत्वाचा पर्ये मानलं जातो हरित ऊर्जा चा वापर करून आपण ज्या गाड्या चालवत असतो त्यांना देखील आपण एचओ फ्रेंडल्ये बानू शिकतो जने वातावरण मधील कार्बोदिओक्सिड चे प्रमाण कमी होऊन हवामान बदल या समस्या पासून आपण वाचू शेकेल .

 

  
 

हे विश्व काय आहे ,universe

 हे  विश्व  काय  आहे?

 What  is  this  universe?

आपण  या  आर्टिकल  मध्ये  हे  विश्व  काय  आहे.  हे  आपण   या आर्टिकल मध्ये  आपण पहाणार आहे  विश्व म्हणजे ग्रह  तारे   सूर्येमाला  असे अनेक  गोष्टी  ज्या  मध्ये सामाविस्ट  आहेत  तयास   विश्व असे  म्हटले  जाते  नेमकं  हे  विश्व म्हणजे   काय  आहे   हि  संकल्पना  काय आहे  ते  फुडें आपण  पहाणार आहे. 

विश्वाचा जन्म वैज्ञानिक पद्धतीने:-

विश्व  म्हणजे  ग्रह  तारे  सूर्ये   आकाशगंगा  या  गोष्टी  चा ज्या मध्ये समावेश आहे  त्या गोष्टीला  विश्व अशे समधले जाते   विश्व्  हे  खूप  अनंत  भागा  मध्ये   पसरले आहे  आता  पर्येंत  जेवढा  भाग  चे  संशोधन  झाले  आहे  त्या  मध्ये असे  माहीत  झाले  कि १९ अब्ज  एवढ्या  आकाशगंगा  अस्तित्वात  आहेत  या  आकाशगंगा  मध्ये  आपली  पुष्टी ज्या  आकाशगंगा  मध्ये  त्या  आकाशगंगास मिल्की  वय  असे  संभोदले  जाते.  विश्वाचे  निर्माण  हे  संशोधनतुन  असे  समजले आहे  कि  याच  मुखे कारण  बिग  बंग थेरी  अशे  मधले जाते.   

  

बिग बँग – सर्वात मोठा सिद्धांत:-

आपण  या  विश्व मध्ये  जे  ग्रह ,तारे व  आकाशगंगा  बघतो  ते  तसे आधी पासूनच  या  विश्व  मध्ये निर्माण  न्हवते  त्या  आधी  विश्व् हे झरो   परिस्थिती  मध्ये  होते  या  मध्ये  न कुठला  आवाज  होता  किंवा  कुठली  हालचाल  अशे हे विश्व हे अस्तित्वात  होते   या  विश्वाचे  निर्माण  हे एक छोट्या  पॉईंट  पासून  झाले  होते  हा  छोटा  पॉईंट  हा खूप  लहान म्हणजेच  अनु  एवढा होता   या  अनु  मध्ये  अनेक  ऊर्जा  हि  सामावली  होती  हि  मध्ये असे  काय  झाले कि त्या  मध्ये मोठ्या  प्रमाण  मध्ये  त्या पॉईंट चा स्फोट  झाला  हा स्फोट  कसा  झाला याचे  उत्तर  हे वैन्यानिक  कडे सुद्धा नाही . 


 हा  स्फोट  ज्या वेळी  झाला  त्या  पॉईंट मध्ये जी  ऊर्जा होती ती भाहेर  पडली  हि  ऊर्जा  अनेक  वर्षी फिरत  राहिली   हि  ऊर्जा ज्या वेळी  थंड  झाली  त्या पासून  अनेक  पदार्थ  तयार  झाले  जसे  कि  इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन  व  नेऊट्रॉन  हे  परदार्थ परत  एकत्र होण्यास  सुरवात   झाली  हे  परथार्त  एकत्र  होण्याचे  कारण   म्हणजे 
गृतीविआकर्षण   सुरवातीला  या  विश्व   मध्ये हाइड्रोजन  अनु अनेक  होते  या  अणूचे  गुटीवीआकर्षण  मुले  संकुचित   होण्यास  सुरवात  झाली  या  तेथील  तापमान  हे वाढू लागले  व  त्या ठिकानीचे ज्या  १००० कोटी  एवढे  झाले  त्या  वेळी एक मोठ्या  तारांची  निर्मती  हि झाली  असे   होत  अनेक  ताराची  निर्मिती  हि  झाले  व  हे  तारे  गुटीवीआकर्षण मुले  एकमेकान  संगे  फिरू लागले   व  असे  अनेक   ताऱ्यांपासून  आकाशगंगांचे  निर्माण झाले 

विश्वाच्या उत्पत्तीचा वैदिक सिद्धांत:-

वैन्यानिक  दुष्टी  नुसार   विश्वाची निर्मती हि  बिग बंग थ्रीरी  ने झाला आहे  पण ह्या थेरी  मध्ये  अनेक  कमी  आहेत त्या मधील  एक म्हजे  बिग बंग थेरी मध्ये प्रमुखाने  एक बिंदू   च्या  स्फोटा  पासून  विश्व ची  निर्मिती  हि झाली  पण  या  बिंदू  मध्ये  स्फोट  कशी  कशा काय झाला  याचे  मुख्ये  कारण  अजून  कोणाला  कळाले  नाही  पण  हिँदु  धर्म नुसार  याची उत्पत्ती  हि  ब्रह्मा  देवांनी केली आहे . 

 
हिंदू धर्मा  नुसार   प्रमुखाने  तीन  देवांना  खूप  महत्व  दिले  जाते  या  मध्ये  विषुनु  ब्रम्हा  शिव  या  अशे  मानले जाते  कि  विषुनु  या देवा  विश्व  ची  देखभाल  करण्याचे काम  असते व  ब्रह्मा  या देवा  कडे  विश्व  बनवण्याचे  काम  हे  जाते  तशेच   देव  शिवा  कडे  एक  नवीन  सुरुवात  करण्या साठी   विश्व सम्पवनाचे काम असते. 

अशे मानले जाते  कि  विशूनु  शेण  मुद्रे मध्ये असताना  त्याच्या  बेंबी  मधून  एका  कमळाची  निर्माती  झाली  व ह्या  कमला पासून  ब्र्हमा  देवाची  निर्मती झाली  व  याच  देवांनी  परत  विश्वा  ची निर्मती हि झाली .     

      

अणुभट्टी म्हणजे काय? त्याचे भाग आणि त्यांचे कार्य

अणुभट्टी म्हणजे काय: त्याचे भाग आणि त्यांचे कार्य  

What is a nuclear reactor? Its parts and their function 

अणुभट्टी म्हणजे काय? त्याचे भाग आणि त्यांचे कार्य

आपण ह्या आर्टिकल मध्ये अणुभट्टी म्हणजे काय व  त्याचे भाग आणि त्यांचे कार्य हे आपण पहाणार आहे.
अणुऊर्जा  हि  मोठ्या  प्रमाणात  वापरली जाते  अणुऊर्जेच्या  वापराने  मोठ्याप्रमाणावर  वीजनिर्मिती  हि अणुभट्टी  च्या सहाय्याने केली जाते. अणुऊर्जा हि  अनुच्या साह्याने होत  असते. हि ऊर्जा  पाणी गरम करण्या साठी वापरली जाते  व  पाण्याची  वाफ  झाल्या नंतर  त्याच्या पासून  वीज  निर्मिती  हि केली जाते  हे  कसे  खडते  व  अणुभट्टी म्हणजे काय  त्याचे भाग आणि त्यांचे कार्य .  

अणुभट्टी म्हणजे काय:

 अणुइंधनावर केंद्रकीय अभिक्रिया घडवून आणतात व अणूमधील केंद्रकीय ऊर्जा मुक्त करतात. संबंधित केंद्रकीय अभिक्रिया समजून घेण्यासाठी युरेनिअम – 235 या नणुइंधनाचे उदाहरण घेऊ. मंद गतीच्या न्यूट्रॉनांचा मारा कला

 असता युरेनिअम 235 ह्या समस्थानिकाच्या केंद्रकाचे विखंडन होऊन क्रिप्टॉन 92 व बेरिअम -41 ह्या वेगळ्या मूलद्रव्यांची केंद्रके व 2 ते 3 न्यूट्रॉन निर्माण होतात. ह्या न्यूट्रॉनांची गती कमी केल्यावर ते आणखी U – 235 केंद्रकांचे

 विखंडन घडवतात. अशा  प्रकारे केंद्रकीय विखंडनाची शृंखला अभिक्रिया होते यामध्ये केंद्रकातून मोठ्या प्रमाणात केंद्रकीय ऊर्जा म्हणजेच अणुऊर्जा मुक्त होते. संभाव्य विस्फोट टाळण्यासाठी शृंखला अभिक्रिया नियंत्रित ठेवतात.

अणुभट्टी म्हणजे काय? त्याचे भाग आणि त्यांचे कार्य

अणुभट्टीमध्ये शृंखला अभिक्रिया नियंत्रित करण्यासाठी न्यूट्रॉन्सचा वेगसंख्याकमी करण्याची आवश्यकता असते. त्यासाठी पुढील गोष्टींचा वापर केला जातो.

1. संचलक / मंदक (Moderator) : न्यूट्रॉन्सचा वेग कमी करण्यासाठी ग्रॅफाईट किंवा जड पाणी यांचा संचलक किंवा मंदक म्हणून वापर केला जातो.

2. नियंत्रक (Controller) : न्यूट्रॉन शोषून घेऊन त्यांची संख्या कमी करण्यासाठी बोरॉन, कॅडमिअम, बेरिलिअम इत्यादींच्या कांड्या नियंत्रक म्हणून वापरतात.

विखंडन प्रक्रियेत निर्माण झालेली उष्णता पाण्याचा शीतक (coolant) म्हणून वापर करून बाजूला काढली जाते. त्या उष्णतेने पाण्याची वाफ करून वाफेच्या साहाय्याने टर्बाइन्स चालविले जातात व वीजनिर्मिती होते.

भाग आणि त्यांचे कार्य:

What is a nuclear reactor? Its parts and their function

पहिला  भाग म्हणजे  अनु  चे  विखंडन  होणे  हा  वरील प्रतिमा  मध्ये दर्शवले  आहे  रिऍक्टर  या  शब्दाने दर्शवले  आहे.  या  भाग मध्ये  अणूचे  विघटनांचे  काम  होत असते  व याच्या पासून जि ऊर्जा  बाह्येर  पडते  ती

  एक  माध्यम  च्या  सहारे  दुसऱ्या भाग मध्ये  पाठवली जाते  त्या  भाग मध्ये  पाण्याची वाफ  हि त्या  ऊर्जा च्या  सहारे  निर्माण  केली जाते  त्या भागास  वरील  प्रतिमा मध्ये स्टीम   जनरेटर  या नावाने  दर्शवले आहे नंतर एका

   माध्यम  च्या  सहारे पाण्याची  वाफ  हि  तिसरया  भाग मध्ये  पाठवली  जाते तेथे  पाण्याच्या वाफे  च्या सहारे  ये  एका  टर्बाइन  ला  फिरवले जाते  व  त्या  टर्बाइन  मुले  जनरेटर  हे  फिरल जाते  व त्या पासून  वीज  हि तयार होत

 असते व नंतर  ती  वाफ हि  कूऊलर  च्या सहाय्याने धंदा केली जाते  व त्या वाफेचे परत पाण्यात रूपांतर केले जाते  व परत  एका  माध्यम  च्या  सहाणे  ते पाणी हे दुसऱ्या  भाग मध्ये  पाठवले जाते  व तेथील  टर्बाइन  फिरत

 असताना  वाफेचे  पाणी झालेले हे  परत  गोळा केले जाते  व  ते पाणी पार्ट वाफ  होण्या साठी पाठवले जाते  हे अशेच  ये  चेकर  हे चालत राहते. 

अणुभट्टी म्हणजे काय? त्याचे भाग आणि त्यांचे कार्य
पाणी धंद करण्याचे यंत्र